एक-दूसरे से सीख सकते हैं शहरी व ग्रामीण छात्र : प्रधानमंत्री मोदी

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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शुक्रवार को वीडियो संदेश के जरिए गुजरात स्थित एकल विद्यालय संगठन को संबोधित किया। एकल विद्यालय संगठन ने देशभर में एक लाख विद्यालय स्थापित किए हैं, इसके लिए प्रधानमंत्री ने संगठन को बधाई दी। प्रधानमंत्री मोदी ने इस अवसर पर प्राइवेट व पब्लिक स्कूलों की जोड़ी बनाने का ‘आइडिया’ दिया। ऐसी जोड़ी बनाने से ग्रामीण छात्र शहरी छात्रों से और शहरी छात्र ग्रामीण छात्रों काफी कुछ सीख सकते हैं। प्रधानमंत्री ने कहा कि ऐसा करने से ‘एक भारत श्रेष्ठ भारत’ के विचार को मजबूती मिलेगी।

यह संगठन दूर दराज के ग्रामीण व आदिवासी क्षेत्रों में रहने वाले करीब 28 लाख बच्चों को शिक्षा मुहैया करा रहा है। संगठन की इस कामयाबी की प्रधानमंत्री ने प्रशंसा की। प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि सामाजिक सेवा के लिए गांधी पीस पुरस्कार से सम्मानित यह संगठन पूरे राष्ट्र के लिए आदर्श प्रेरणास्रोत है।

प्रधानमंत्री मोदी ने संगठन को सुझाव देते हुए वर्ष स्वतंत्रता दिवस की वर्षगांठ अनोखे तरीके से मनाने की सलाह दी। उन्होंने कहा कि इन स्कूलों में ‘आजादी की लड़ाई में आदिवासियों का योगदान’ विषय पर परिचर्चा व तर्क प्रतियोगिताएं की जा सकती हैं। इसके साथ ही विभिन्न प्रतियोगिताएं व एकल परिवार एक खेल महाकुंभ का भी आयोजन कर सकता है। इन्हें इस वर्ष से शुरू करके 2022 में आजादी की 75वीं वर्षगांठ तक पूरा किया जा सकता है।

न्यूज स्त्रोत आईएएनएस

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बहुत ही मुश्किल है अपने बारे में लिखना । इसलिए ज्यादा कुछ नहीं, मैं बहुत ही सरल व्यतित्व का व्यक्ति हूं । खुशमिजाज हूं ए इसलिए चेहरे पर हमेशा खुशी रहती हैए और मुझे अकेला रहना ज्यादा पंसद है। मेरा स्वभाव है कि मेरी बजह से किसी का कोई नुकसान नहीं होना चाहिए और ना ही किसी का दिल दुखना चाहिए। चाहे वो व्यक्ति अच्छा हो या बुरा। मेरे इस स्वभाव के कारण कभी कभी मुझे खामियाजा भी भुगतान पड़ता है। मैं अक्सर उनके बारे में सोचकर भुला देता हूं क्योंकि खुश रहने का हुनर सिर्फ मेरे पास है। मेरी अपनी विचारए विचारधारा है जिसे में अभिव्यक्त करता रहता हूं । जिन लोगों के विचारों से कभी प्रभावित भी होता हूं तो उन्हें फोलो कर लेता हूं । अभी सफर की शुरुआत है मैने कंप्यूटर ऑफ माटर्स की डिग्री हासिल की है और इस मीडीया क्षेत्र में अभी नया हूं। मगर मुझे अब इस क्षेत्र में काम करना अच्छा लग रहा है। और फिर इसी में काम करने का मन बना लेना दूसरों के लिये अश्चर्य पूर्ण होगा। लेकिन इससे पहले और आज भी ब्लागर ने एक मंच दिया चिठ्ठा के रुप में, जहां बिना रोक टोक के आसानी से सबकुछ लिखा या बताया जा सका। कभी कभी मन में उठ रही बातों या भावों को शब्दों में पिरोयाए उनमें खुद की और दूसरों की कहानी कही। कभी उनके द्वारा किसी को पुकाराए तो कभी खुद ही रूठ गया। कई बार लिखने पर भी मन सतुष्ट नहीं हुआ और निरंतर कुछ नया लिखने मन बनता रहता है। अजीब सी बेचैनी जो न जाने क्या करवाएगी और कितना कुछ कर गुजर जाने की तमन्ना लिए निकले हैं इन सफरों, जहां उम्मीद और विश्वास दोनों कायम हैं जो अर्जुन के भांति लक्ष्य को भेद देंगे । मुझे अभी अपने जीवन में बहुत कुछ करना है किसी के सपनों को पूरा करना हैं । अब तो बस मेरा एक ही लक्ष्य हैं कि मैं बस उसके सपने पूरें करू।

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