यूपी : 4 पहिया वाहन की टक्कर से बाइक सवार मामा, भांजी की मौत

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उत्तर प्रदेश में बांदा जिले की शहर सीमा में कताई मिल के पास एक अज्ञात वाहन की टक्कर लगने से बाइक सवार एक युवक और उसकी मासूम भांजी की मौत हो गई। शहर कोतवाली प्रभारी निरीक्षक (एसएचओ) दिनेश सिंह ने मंगलवार को कहा, “यह दुर्घटना सोमवार दोपहर बाद की है। शहर के शुकुल कुंआ मुहल्ला निवासी जितेंद्र यादव (30) अपनी नौ साल की भांजी महक और सात साल के भांजे मयंक को बाइक से निजी स्कूल में पढ़ रहे बेटे को लेने जा रहा था। तभी शहर सीमा में कताई मिल के पास उसकी बाइक को अज्ञात चार पहिया वाहन ने टक्कर मार दी, जिससे जितेंद्र की मौके पर ही मौत हो गई।”

उन्होंने कहा, “गंभीर रूप से घायल उसकी भांजी और भांजे को कानपुर पुरा ले जाया गया, जहां देर रात इलाज के दौरान भांजी महक (9) की भी मौत हो गई। अभी मयंक का इलाज चल रहा है, लेकिन उसकी भी हालत नाजुक बनी हुई है।”

सिंह ने कहा, “युवक जितेंद्र और उसकी भांजी के शव का पोस्टमॉर्टम कराया गया है। इस संबंध में अज्ञात वाहन चालक के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर उसकी तलाश की जा रही है।”

न्यूज स्त्रोत आईएएनएस

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बहुत ही मुश्किल है अपने बारे में लिखना । इसलिए ज्यादा कुछ नहीं, मैं बहुत ही सरल व्यतित्व का व्यक्ति हूं । खुशमिजाज हूं ए इसलिए चेहरे पर हमेशा खुशी रहती हैए और मुझे अकेला रहना ज्यादा पंसद है। मेरा स्वभाव है कि मेरी बजह से किसी का कोई नुकसान नहीं होना चाहिए और ना ही किसी का दिल दुखना चाहिए। चाहे वो व्यक्ति अच्छा हो या बुरा। मेरे इस स्वभाव के कारण कभी कभी मुझे खामियाजा भी भुगतान पड़ता है। मैं अक्सर उनके बारे में सोचकर भुला देता हूं क्योंकि खुश रहने का हुनर सिर्फ मेरे पास है। मेरी अपनी विचारए विचारधारा है जिसे में अभिव्यक्त करता रहता हूं । जिन लोगों के विचारों से कभी प्रभावित भी होता हूं तो उन्हें फोलो कर लेता हूं । अभी सफर की शुरुआत है मैने कंप्यूटर ऑफ माटर्स की डिग्री हासिल की है और इस मीडीया क्षेत्र में अभी नया हूं। मगर मुझे अब इस क्षेत्र में काम करना अच्छा लग रहा है। और फिर इसी में काम करने का मन बना लेना दूसरों के लिये अश्चर्य पूर्ण होगा। लेकिन इससे पहले और आज भी ब्लागर ने एक मंच दिया चिठ्ठा के रुप में, जहां बिना रोक टोक के आसानी से सबकुछ लिखा या बताया जा सका। कभी कभी मन में उठ रही बातों या भावों को शब्दों में पिरोयाए उनमें खुद की और दूसरों की कहानी कही। कभी उनके द्वारा किसी को पुकाराए तो कभी खुद ही रूठ गया। कई बार लिखने पर भी मन सतुष्ट नहीं हुआ और निरंतर कुछ नया लिखने मन बनता रहता है। अजीब सी बेचैनी जो न जाने क्या करवाएगी और कितना कुछ कर गुजर जाने की तमन्ना लिए निकले हैं इन सफरों, जहां उम्मीद और विश्वास दोनों कायम हैं जो अर्जुन के भांति लक्ष्य को भेद देंगे । मुझे अभी अपने जीवन में बहुत कुछ करना है किसी के सपनों को पूरा करना हैं । अब तो बस मेरा एक ही लक्ष्य हैं कि मैं बस उसके सपने पूरें करू।

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