आप सांसद संजय सिंह 33 श्रमिकों को प्लेन से आज ले जाएंगे पटना

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दिल्ली से आम आदमी पार्टी के सांसद संजय सिंह ने प्रवासी मजदूरों को उनके घर पहुचाने के लिए एक नायाब तरीका ढूंढ निकाला है। संजय सिंह आज दिल्ली से 33 दिहाड़ी मजदूरों को शाम 4 बजे हवाई जहाज के जरिये पटना ले जा रहे हैं। संजय सिंह ने इन मजदूरों को ले जाने की व्यवस्था बतौर सांसद के रुप मे एक साल में मिलने वाले 34 टिकटों का इस्तेमाल कर किया है। संजय सिंह खुद इन प्रवासी मजदूरों के साथ पटना जा रहे हैं। संजय सिंह के इस पहल की दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने तारीफ की है।

मुख्यमंत्री केजरीवाल ने ट्वीट कर लिखा है कि संजय सिंह की इस अनूठी पहल से हम सबको प्रेरणा मिली है। उन्होंने कहा है कि जिनको भगवान ने साधन दिये हैं, उन साधनों का इस्तेमाल दूसरों की सेवा के लिये करें। उन्होंने आगे लिखा है कि संजय सिंह को इस काम के लिये बधाई।

गौरतलब है कि संजय सिंह पहले भी बिहार और उत्तर प्रदेश के प्रवासी लोगों को उनके गृह जिले बसों के जरिये भेजते रहे हैं। लगभग हर रोज 5 से 6 बस संजय सिंह के नार्थ एवेन्यू स्थित सरकारी निवास से रवाना होती रही है।

न्यूज स्त्रोत आईएएनएस

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बहुत ही मुश्किल है अपने बारे में लिखना । इसलिए ज्यादा कुछ नहीं, मैं बहुत ही सरल व्यतित्व का व्यक्ति हूं । खुशमिजाज हूं ए इसलिए चेहरे पर हमेशा खुशी रहती हैए और मुझे अकेला रहना ज्यादा पंसद है। मेरा स्वभाव है कि मेरी बजह से किसी का कोई नुकसान नहीं होना चाहिए और ना ही किसी का दिल दुखना चाहिए। चाहे वो व्यक्ति अच्छा हो या बुरा। मेरे इस स्वभाव के कारण कभी कभी मुझे खामियाजा भी भुगतान पड़ता है। मैं अक्सर उनके बारे में सोचकर भुला देता हूं क्योंकि खुश रहने का हुनर सिर्फ मेरे पास है। मेरी अपनी विचारए विचारधारा है जिसे में अभिव्यक्त करता रहता हूं । जिन लोगों के विचारों से कभी प्रभावित भी होता हूं तो उन्हें फोलो कर लेता हूं । अभी सफर की शुरुआत है मैने कंप्यूटर ऑफ माटर्स की डिग्री हासिल की है और इस मीडीया क्षेत्र में अभी नया हूं। मगर मुझे अब इस क्षेत्र में काम करना अच्छा लग रहा है। और फिर इसी में काम करने का मन बना लेना दूसरों के लिये अश्चर्य पूर्ण होगा। लेकिन इससे पहले और आज भी ब्लागर ने एक मंच दिया चिठ्ठा के रुप में, जहां बिना रोक टोक के आसानी से सबकुछ लिखा या बताया जा सका। कभी कभी मन में उठ रही बातों या भावों को शब्दों में पिरोयाए उनमें खुद की और दूसरों की कहानी कही। कभी उनके द्वारा किसी को पुकाराए तो कभी खुद ही रूठ गया। कई बार लिखने पर भी मन सतुष्ट नहीं हुआ और निरंतर कुछ नया लिखने मन बनता रहता है। अजीब सी बेचैनी जो न जाने क्या करवाएगी और कितना कुछ कर गुजर जाने की तमन्ना लिए निकले हैं इन सफरों, जहां उम्मीद और विश्वास दोनों कायम हैं जो अर्जुन के भांति लक्ष्य को भेद देंगे । मुझे अभी अपने जीवन में बहुत कुछ करना है किसी के सपनों को पूरा करना हैं । अब तो बस मेरा एक ही लक्ष्य हैं कि मैं बस उसके सपने पूरें करू।

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