यूपी : नाम बदलने की राजनीति के खिलाफ जन अभियान की तैयारी

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फैजाबाद और इलाहाबाद का नाम बदले जाने के खिलाफ लखनऊ स्थित पिछड़ा समाज महासभा कार्यालय में शनिवार को बैठक हुई। बैठक में एक स्वर में इसे मूलभूत समस्यओं से भटकाने की ओछी राजनीति कहा गया। इसके खिलाफ जन अभियान चलाए जाने का प्रस्ताव आया। नाम बदलने की राजनीति के खिलाफ 11 नवंबर को लखनऊ स्थित कार्यालय में फैजाबाद, सुल्तानपुर, इलाहाबाद और आजमगढ़ के साथियों के साथ बैठक कर जनाभियान की रूपरेखा तय की जाएगी।

वक्ताओं ने कहा कि नाम बदलने और मूर्तियों की राजनीति जनता के धन का दुरुपयोग कर रही है। जिलों के नाम बदलने में आने वाले खर्च से उद्योग, बेरोजगारी, शिक्षा एवं चिकित्सा जैसी मूलभूत जरूरतों को पूरा किया जा सकता था, पर सरकार का मानसिक दिवालियापन है कि वो जनता के धन का दुरुपयोग कर रही है। बड़े पैमाने पर गुजरात-महाराष्ट्र से यूपी और बिहारी के नाम पर लोगों को मारा-पीटा जा रहा है और पलायन करने पर मजबूर किया जा रहा है, पर सरकार को इसकी कोई चिंता नहीं है।

वक्ताओं ने कहा कि सरकार मनुवादी एजेंडे के तहत इलाहाबाद और फैजाबाद का नाम बदल कर चुनाव से पहले सांप्रदायिक ध्रुवीकरण कर रही है। दीपोत्सव के नाम पर करोड़ों रुपये फूंकने वाली योगी सरकार बताए कि प्रदेश में जो लोग भुखमरी से मर रहे हैं, उनके लिए क्या किया। ऑक्सीजन और दवाओं के आभाव में जहां गरीबों की मौत हो रही है, वहीं स्कूलों में अभी तक बच्चों को स्वेटर और जूते भी नहीं मुहैया हो पाए हैं।

बैठक में रिहाई मंच अध्यक्ष मुहम्मद शुऐब, पिछड़ा समाज महासभा संयोजक एहसानुल हक मलिक, डॉ. एमडी खान, ऑल इंडिया वर्कर्स काउंसिल के संयोजक ओ.पी सिन्हा, सृजनयोगी आदियोग, शकील कुरैशी, रोबिन वर्मा, बाकेलाल, सचेंद्र प्रताप यादव, शिव नारायण कुशवाहा, उदयराज शर्मा, प्रणव प्रसाद और राजीव यादव शामिल हुए।

न्यूज स्त्रोत आईएएनएस

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