यूपी: दलितों का मुद्दा उठाने वाले पीपीएस ने स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति का आवेदन सौंपा

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उत्तर प्रदेश में दलित उत्पीड़न और युवाओं की नौकरी का मुद्दा उठाते हुए इस्तीफे की पेशकश करने वाले प्रांतीय पुलिस सेवा अधिकारी बी.पी. अशोक ने स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति के लिए डीजीपी मुख्यालय को अपना प्रार्थना पत्र सौंप दिया है। पुलिस प्रवक्ता राहुल श्रीवास्तव के मुताबिक मंगलवार को उनका प्रार्थना पत्र मुख्यालय को प्राप्त हो गया।

पुलिस सूत्रों के मुताबिक, डीजीपी की ओर से प्रार्थना पत्र को स्वीकार कर अग्रिम कार्रवाई के लिए शासन को भेज दिया जाएगा। इसके बाद शासन तय करेगा कि उन्हें अनिवार्य सेवानिवृत्ति दी जाए या नहीं। वह 1992 बैच के पीपीएस अधिकारी हैं।

बी.पी. अशोक ने सोमवार को राष्ट्रपति को पत्र लिखकर दलित उत्पीड़न और युवाओं को नौकरी का मुद्दा उठाते हुए इस्तीफे की पेशकश की थी। उन्होंने स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति के लिए प्रार्थना पत्र एडीजी एडमिन हरिराम शर्मा को सौंपा।

न्यूज स्त्रोत आईएएनएस


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बहुत ही मुश्किल है अपने बारे में लिखना । इसलिए ज्यादा कुछ नहीं, मैं बहुत ही सरल व्यतित्व का व्यक्ति हूं । खुशमिजाज हूं ए इसलिए चेहरे पर हमेशा खुशी रहती हैए और मुझे अकेला रहना ज्यादा पंसद है। मेरा स्वभाव है कि मेरी बजह से किसी का कोई नुकसान नहीं होना चाहिए और ना ही किसी का दिल दुखना चाहिए। चाहे वो व्यक्ति अच्छा हो या बुरा। मेरे इस स्वभाव के कारण कभी कभी मुझे खामियाजा भी भुगतान पड़ता है। मैं अक्सर उनके बारे में सोचकर भुला देता हूं क्योंकि खुश रहने का हुनर सिर्फ मेरे पास है। मेरी अपनी विचारए विचारधारा है जिसे में अभिव्यक्त करता रहता हूं । जिन लोगों के विचारों से कभी प्रभावित भी होता हूं तो उन्हें फोलो कर लेता हूं । अभी सफर की शुरुआत है मैने कंप्यूटर ऑफ माटर्स की डिग्री हासिल की है और इस मीडीया क्षेत्र में अभी नया हूं। मगर मुझे अब इस क्षेत्र में काम करना अच्छा लग रहा है। और फिर इसी में काम करने का मन बना लेना दूसरों के लिये अश्चर्य पूर्ण होगा। लेकिन इससे पहले और आज भी ब्लागर ने एक मंच दिया चिठ्ठा के रुप में, जहां बिना रोक टोक के आसानी से सबकुछ लिखा या बताया जा सका। कभी कभी मन में उठ रही बातों या भावों को शब्दों में पिरोयाए उनमें खुद की और दूसरों की कहानी कही। कभी उनके द्वारा किसी को पुकाराए तो कभी खुद ही रूठ गया। कई बार लिखने पर भी मन सतुष्ट नहीं हुआ और निरंतर कुछ नया लिखने मन बनता रहता है। अजीब सी बेचैनी जो न जाने क्या करवाएगी और कितना कुछ कर गुजर जाने की तमन्ना लिए निकले हैं इन सफरों, जहां उम्मीद और विश्वास दोनों कायम हैं जो अर्जुन के भांति लक्ष्य को भेद देंगे । मुझे अभी अपने जीवन में बहुत कुछ करना है किसी के सपनों को पूरा करना हैं । अब तो बस मेरा एक ही लक्ष्य हैं कि मैं बस उसके सपने पूरें करू।

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