यूपी : चिन्मयानंद की बढ़ सकती हैं मुश्किलें, एक पुराने मामले में सुनवाई 13 को

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यौन शोषण के मामले में जेल में बंद पूर्व केंद्रीय गृह राज्य मंत्री स्वामी चिन्मयानंद की मुसीबतें कम होंने का नाम नहीं ले रही हैं। उनकी शिष्या के यौन शोषण के एक और करीब सात साल पुराने मामले में अदालत 13 दिसंबर को सुनवाई करेगी। पीड़िता के अधिवक्ता मुकेश कुमार गुप्ता ने बताया कि स्वामी चिन्मयानंद पर उनके ही कॉलेज की प्राचार्य के यौन शोषण का मामला शहर कोतवाली में दर्ज कराया गया था। पुलिस ने 23 अक्टूबर 2012 में चार्जशीट न्यायालय भेज दी थी जो अभी तक विचाराधीन है।

उन्होंने बताया कि 24 मई 2018 को मुख्य न्यायिक दंडाधिकारी के कोर्ट में प्रदेश सरकार द्वारा चिन्मयानंद पर चल रहे मुकदमे को वापस लेने का प्रार्थना पत्र भेजा गया था। जिस पर पीड़िता ने आपत्ति दाखिल की थी। जिसे देखते हुए न्यायालय ने प्रार्थना पत्र खारिज कर दिया था।

उन्होंने कहा कि इसके बाद स्वामी चिन्मयानंद हाईकोर्ट चले गए और वहां से उन्होंने अदालत द्वारा की जा रही कार्रवाई को रोकने का स्थगन आदेश प्राप्त कर लिया। इसके बाद चिन्मयानंद की पत्रावली हाई कोर्ट भेज दी गई, जिसे अब पुन: हाईकोर्ट ने यह पत्रावली शाहजहांपुर न्यायालय भेज दी है।

अधिवक्ता ने कहा कि यहां माननीयों के लिए एक कोर्ट बना दिया गया है, इसी न्यायालय के अपर जिला जज तृतीय नरेंद्र कुमार पांडे ने स्वामी चिन्मयानंद दुष्कर्म के इस मुकदमे में 13 दिसंबर को सुनवाई की तिथि तय की है।

उन्होंने कहा कि यदि स्थगन आदेश खत्म हो गया होगा तो फिर चिन्मयानंद का गिरफ्तारी वारंट जारी हो सकता है, क्योंकि चिन्मयानंद अभी तक इस दुष्कर्म मामले में न तो अदालत के समक्ष उपस्थित हुए और न ही जमानत ही कराई है।

गौरतलब है कि स्वामी चिन्मयानंद पर आरोप है कि उन्होंने अपनी एक शिष्या के साथ यौन शोषण किया था। बाद में उन्होंने उसे अपने ही संस्थान में प्राचार्य बना दिया था। यह मामला वर्ष 2012 में शाहजहांपुर के शहर कोतवाली में दर्ज किया गया था।

न्यूज स्त्रोत आईएएनएस

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