जलियांवाला बाग में सरदार उधम सिंह की प्रतिमा का अनावरण

0
171

बताया गया है कि केंद्रीय गृह मंत्री राजनाथ सिंह ने मंगलवार को अमृतसर के जलियांवाला बाग में स्वतंत्रता सेनानी सरदार उधम सिंह की 10 फुट ऊंची प्रतिमा का अनावरण किया। इस पहल को एनजीओ इंटरनेशनल सरब कामबोज सभा ने अंजाम दिया, जो चार दशकों से मूर्ति की स्थापना की मांग कर रहे थे। जलियांवाला बाग हत्याकांड का बदला लेने की प्रतिज्ञा दर्शाती उधम सिंह की संगमरमर की प्रतिमा को सोमवार को मुख्य प्रवेश द्वार पर स्थापित किया गया।

ऐसा कहा जा रहा है कि इस प्रतिमा का निर्माण राजस्थान में 10 लाख रुपये में हुआ है। उधम सिंह ने जलियांवाला बाग हत्यकांड का बदला लेने के लिए 13 मार्च, 1940 को माइकल ओ ड्वायर की हत्या की थी।

न्यूज स्त्रोत आईएएनएस


SHARE
Previous articleअभिनेता रजनीकांत ने कहा, पूर्णकालिक राजनेता नहीं बना हूं 
Next articleगोवा: सांसदों ने अमित शाह से खनन प्रतिबंध पर बात की
बहुत ही मुश्किल है अपने बारे में लिखना । इसलिए ज्यादा कुछ नहीं, मैं बहुत ही सरल व्यतित्व का व्यक्ति हूं । खुशमिजाज हूं ए इसलिए चेहरे पर हमेशा खुशी रहती हैए और मुझे अकेला रहना ज्यादा पंसद है। मेरा स्वभाव है कि मेरी बजह से किसी का कोई नुकसान नहीं होना चाहिए और ना ही किसी का दिल दुखना चाहिए। चाहे वो व्यक्ति अच्छा हो या बुरा। मेरे इस स्वभाव के कारण कभी कभी मुझे खामियाजा भी भुगतान पड़ता है। मैं अक्सर उनके बारे में सोचकर भुला देता हूं क्योंकि खुश रहने का हुनर सिर्फ मेरे पास है। मेरी अपनी विचारए विचारधारा है जिसे में अभिव्यक्त करता रहता हूं । जिन लोगों के विचारों से कभी प्रभावित भी होता हूं तो उन्हें फोलो कर लेता हूं । अभी सफर की शुरुआत है मैने कंप्यूटर ऑफ माटर्स की डिग्री हासिल की है और इस मीडीया क्षेत्र में अभी नया हूं। मगर मुझे अब इस क्षेत्र में काम करना अच्छा लग रहा है। और फिर इसी में काम करने का मन बना लेना दूसरों के लिये अश्चर्य पूर्ण होगा। लेकिन इससे पहले और आज भी ब्लागर ने एक मंच दिया चिठ्ठा के रुप में, जहां बिना रोक टोक के आसानी से सबकुछ लिखा या बताया जा सका। कभी कभी मन में उठ रही बातों या भावों को शब्दों में पिरोयाए उनमें खुद की और दूसरों की कहानी कही। कभी उनके द्वारा किसी को पुकाराए तो कभी खुद ही रूठ गया। कई बार लिखने पर भी मन सतुष्ट नहीं हुआ और निरंतर कुछ नया लिखने मन बनता रहता है। अजीब सी बेचैनी जो न जाने क्या करवाएगी और कितना कुछ कर गुजर जाने की तमन्ना लिए निकले हैं इन सफरों, जहां उम्मीद और विश्वास दोनों कायम हैं जो अर्जुन के भांति लक्ष्य को भेद देंगे । मुझे अभी अपने जीवन में बहुत कुछ करना है किसी के सपनों को पूरा करना हैं । अब तो बस मेरा एक ही लक्ष्य हैं कि मैं बस उसके सपने पूरें करू।

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here