अनाधिकारिक टेस्ट : अभिमन्यु ईश्वरण का शतक, इंडिया-ए 282/3

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अभिमन्यु ईश्वरण (117), कप्तान लोकेश राहुल (81) और प्रियांक पांचाल (50) की बेहतरीन पारियों के दम पर इंडिया-ए ने यहां इंग्लैंड लायंस के खिलाफ खेले जा रहे दूसरे अनाधिकारिक टेस्ट मैच के पहले दिन बुधवार को अपनी पहली पारी में तीन विकेट पर 282 रन का मजबूत स्कोर बना लिया। मेजबान इंडिया-ए ने टॉस जीतकर पहले बल्लेबाजी करने का फैसला किया। ईश्वरण और राहुल ने पहले विकेट के लिए 178 रन की साझेदारी कर टीम को ठोस शुरुआत दी। राहुल ने 116 गेंदों की पारी में 11 चौके लगाए।

राहुल के आउट होने के बाद ईश्वरण ने पांचाल के साथ दूसरे विकेट लिए 74 रन जोड़े। वह टीम के 252 के स्कोर पर आउट हुए।

ईश्वरण ने 222 गेंदों की शतकीय पारी में 13 चौके और एक छक्का लगाया। उनका यह 11वां प्रथम श्रेणी शतक है। वहीं, पिछले छह मुकाबलों में उनका यह चौथा शतक है।

पिछले मैच के दोहरे शतकधारी पांचाल ने 88 गेंदों पर सात चौके जड़े। उनका यह 21वां प्रथम श्रेणी अर्धशतक है। पांचाल का विकेट 282 के स्कोर पर गिरा। उनके आउट होते ही स्टंप्स की घोषणा कर दी गई।

करुण नायर 14 रन बनाकर नाबाद लौटे। वह अब तक 33 गेंदों पर एक चौका और एक छक्का लगा चुके हैं।

इंग्लैंड लायंस के लिए टॉम बेली, जैक चैपल और डोमिनीक बेस ने एक-एक विकेट हासिल किए हैं।

न्यूज स्त्रोत आईएएनएस


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बहुत ही मुश्किल है अपने बारे में लिखना । इसलिए ज्यादा कुछ नहीं, मैं बहुत ही सरल व्यतित्व का व्यक्ति हूं । खुशमिजाज हूं ए इसलिए चेहरे पर हमेशा खुशी रहती हैए और मुझे अकेला रहना ज्यादा पंसद है। मेरा स्वभाव है कि मेरी बजह से किसी का कोई नुकसान नहीं होना चाहिए और ना ही किसी का दिल दुखना चाहिए। चाहे वो व्यक्ति अच्छा हो या बुरा। मेरे इस स्वभाव के कारण कभी कभी मुझे खामियाजा भी भुगतान पड़ता है। मैं अक्सर उनके बारे में सोचकर भुला देता हूं क्योंकि खुश रहने का हुनर सिर्फ मेरे पास है। मेरी अपनी विचारए विचारधारा है जिसे में अभिव्यक्त करता रहता हूं । जिन लोगों के विचारों से कभी प्रभावित भी होता हूं तो उन्हें फोलो कर लेता हूं । अभी सफर की शुरुआत है मैने कंप्यूटर ऑफ माटर्स की डिग्री हासिल की है और इस मीडीया क्षेत्र में अभी नया हूं। मगर मुझे अब इस क्षेत्र में काम करना अच्छा लग रहा है। और फिर इसी में काम करने का मन बना लेना दूसरों के लिये अश्चर्य पूर्ण होगा। लेकिन इससे पहले और आज भी ब्लागर ने एक मंच दिया चिठ्ठा के रुप में, जहां बिना रोक टोक के आसानी से सबकुछ लिखा या बताया जा सका। कभी कभी मन में उठ रही बातों या भावों को शब्दों में पिरोयाए उनमें खुद की और दूसरों की कहानी कही। कभी उनके द्वारा किसी को पुकाराए तो कभी खुद ही रूठ गया। कई बार लिखने पर भी मन सतुष्ट नहीं हुआ और निरंतर कुछ नया लिखने मन बनता रहता है। अजीब सी बेचैनी जो न जाने क्या करवाएगी और कितना कुछ कर गुजर जाने की तमन्ना लिए निकले हैं इन सफरों, जहां उम्मीद और विश्वास दोनों कायम हैं जो अर्जुन के भांति लक्ष्य को भेद देंगे । मुझे अभी अपने जीवन में बहुत कुछ करना है किसी के सपनों को पूरा करना हैं । अब तो बस मेरा एक ही लक्ष्य हैं कि मैं बस उसके सपने पूरें करू।

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