Unnao case : इलाहाबाद हाईकोर्ट को भेजी गई पत्र याचिका

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उन्नाव के बबुरहा गांव के एक खेत में तीन नाबालिग दलित लड़कियां संदिग्ध परिस्थितियों में बेसुध पाई गई थीं। इनमें से दो की मौत हो चुकी थी और एक इस वक्त अस्पताल में भर्ती है। इस मामले को अपने संज्ञान में लेने के लिए इलाहाबाद हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश को एक पत्र याचिका भेजी गई है। याचिका पर प्रतिक्रिया का मिलना अभी बाकी है।

एकीकृत जन आंदोलन की अध्यक्ष नीलिम दत्ता द्वारा भेजी गई इस याचिका में कहा गया है कि इस मामले पर उन्नाव पुलिस न्याय करेगी, इस पर किसी को भरोसा नहीं है।

रविवार को उन्नाव पुलिस ने उन पर अपने ट्वीट्स के माध्यम से ‘भ्रामक जानकारियां’ फैलाने के आरोप में एक मामला भी दर्ज किया है।

याचिकाकर्ता ने अदालत से मामले को संज्ञान में लेने और इसे अपनी देखरेख में लेने, इसकी जांच करने और इसे केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) को सौंपने का अनुरोध किया है।

इसके अलावा, याचिकाकर्ता ने अदालत से यह भी अनुरोध किया है कि इस मामले में अकेले बचीं नाबालिग लड़की को एयर-एम्बुलेंस द्वारा दिल्ली के अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान में स्थानांतरित करने का निर्देश उत्तर प्रदेश सरकार को दिया जाए।

श्रन्यूज सत्रोत आईएएनएस

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बहुत ही मुश्किल है अपने बारे में लिखना । इसलिए ज्यादा कुछ नहीं, मैं बहुत ही सरल व्यतित्व का व्यक्ति हूं । खुशमिजाज हूं ए इसलिए चेहरे पर हमेशा खुशी रहती हैए और मुझे अकेला रहना ज्यादा पंसद है। मेरा स्वभाव है कि मेरी बजह से किसी का कोई नुकसान नहीं होना चाहिए और ना ही किसी का दिल दुखना चाहिए। चाहे वो व्यक्ति अच्छा हो या बुरा। मेरे इस स्वभाव के कारण कभी कभी मुझे खामियाजा भी भुगतान पड़ता है। मैं अक्सर उनके बारे में सोचकर भुला देता हूं क्योंकि खुश रहने का हुनर सिर्फ मेरे पास है। मेरी अपनी विचारए विचारधारा है जिसे में अभिव्यक्त करता रहता हूं । जिन लोगों के विचारों से कभी प्रभावित भी होता हूं तो उन्हें फोलो कर लेता हूं । अभी सफर की शुरुआत है मैने कंप्यूटर ऑफ माटर्स की डिग्री हासिल की है और इस मीडीया क्षेत्र में अभी नया हूं। मगर मुझे अब इस क्षेत्र में काम करना अच्छा लग रहा है। और फिर इसी में काम करने का मन बना लेना दूसरों के लिये अश्चर्य पूर्ण होगा। लेकिन इससे पहले और आज भी ब्लागर ने एक मंच दिया चिठ्ठा के रुप में, जहां बिना रोक टोक के आसानी से सबकुछ लिखा या बताया जा सका। कभी कभी मन में उठ रही बातों या भावों को शब्दों में पिरोयाए उनमें खुद की और दूसरों की कहानी कही। कभी उनके द्वारा किसी को पुकाराए तो कभी खुद ही रूठ गया। कई बार लिखने पर भी मन सतुष्ट नहीं हुआ और निरंतर कुछ नया लिखने मन बनता रहता है। अजीब सी बेचैनी जो न जाने क्या करवाएगी और कितना कुछ कर गुजर जाने की तमन्ना लिए निकले हैं इन सफरों, जहां उम्मीद और विश्वास दोनों कायम हैं जो अर्जुन के भांति लक्ष्य को भेद देंगे । मुझे अभी अपने जीवन में बहुत कुछ करना है किसी के सपनों को पूरा करना हैं । अब तो बस मेरा एक ही लक्ष्य हैं कि मैं बस उसके सपने पूरें करू।

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