यूएनएलएफ नेता मेघन जेल से रिहा

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पूर्वोत्तर राज्य मणिपुर में अशांति के मद्देनजर नगा विद्रोहियों से वार्ता को इच्छुक सरकार ने शनिवार की शाम युनाइटेड नेशनल लिबरेशन (यूएनएलएफ) नेता आर.के. मेघन उर्फ सनायैमा को गुवाहाटी केंद्रीय कारागार से रिहा कर दिया। यूएनएलएफ नेता मेघन की रिहाई को मीडिया ने ज्यादा तवज्जो नहीं दिया। मेघन के निकट सहयोगियों ने बताया कि उनका नेता राज्य के विरुद्ध युद्ध छोड़ने के आरोप में पिछले 10 साल से जेल में बंद था।

मेघन के सोमवार को मणिपुर की राजधानी इम्फाल पहुंचने की संभावना है।

यूएनएलएफ का गठन सन् 1964 में हुआ था। पूर्वोत्तर भारत का यह सबसे पुराना विद्रोही संगठन है, जो मणिपुर की स्वायत्तता के लिए संघर्ष कर रहा है।

सनायैमा के नाम से चर्चित मेघन का कहना है कि मणिपुर मार्शल लॉ के अधीन है। इस राज्य में चुनावों की वैधता नहीं रह गई है।

मेघन को बांग्लादेशी अधिकारियों ने वर्ष 2010 में गिरफ्तार कर भारतीय अधिकारियों के हवाले कर दिया था। मेघन ने क्षेत्र के दूसरे विद्रोही नेताओं की तरह कभी जमानत के लिए अर्जी नहीं दी थी।

मेघन के वकील गुनेधर मोइरंगथेम ने कहा कि उनके मुवक्किल को 2016 में दोषी करार दिया गया था। उसे 10 साल जेल की सजा सुनाई गई थी और उस पर 70,000 रुपये का जुर्माना लगाया गया था।

मोइरंगथेम ने कहा, “उसके कैद की मियाद हालांकि 2020 में पूरी होने वाली थी। कैद के दौरान उसके अच्छे आचरण को देखते हुए उसकी बची हुई सजा माफ कर उसे शनिवार को रिहा कर दिया गया।”

न्यूज स्त्रोत आईएएनएस


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बहुत ही मुश्किल है अपने बारे में लिखना । इसलिए ज्यादा कुछ नहीं, मैं बहुत ही सरल व्यतित्व का व्यक्ति हूं । खुशमिजाज हूं ए इसलिए चेहरे पर हमेशा खुशी रहती हैए और मुझे अकेला रहना ज्यादा पंसद है। मेरा स्वभाव है कि मेरी बजह से किसी का कोई नुकसान नहीं होना चाहिए और ना ही किसी का दिल दुखना चाहिए। चाहे वो व्यक्ति अच्छा हो या बुरा। मेरे इस स्वभाव के कारण कभी कभी मुझे खामियाजा भी भुगतान पड़ता है। मैं अक्सर उनके बारे में सोचकर भुला देता हूं क्योंकि खुश रहने का हुनर सिर्फ मेरे पास है। मेरी अपनी विचारए विचारधारा है जिसे में अभिव्यक्त करता रहता हूं । जिन लोगों के विचारों से कभी प्रभावित भी होता हूं तो उन्हें फोलो कर लेता हूं । अभी सफर की शुरुआत है मैने कंप्यूटर ऑफ माटर्स की डिग्री हासिल की है और इस मीडीया क्षेत्र में अभी नया हूं। मगर मुझे अब इस क्षेत्र में काम करना अच्छा लग रहा है। और फिर इसी में काम करने का मन बना लेना दूसरों के लिये अश्चर्य पूर्ण होगा। लेकिन इससे पहले और आज भी ब्लागर ने एक मंच दिया चिठ्ठा के रुप में, जहां बिना रोक टोक के आसानी से सबकुछ लिखा या बताया जा सका। कभी कभी मन में उठ रही बातों या भावों को शब्दों में पिरोयाए उनमें खुद की और दूसरों की कहानी कही। कभी उनके द्वारा किसी को पुकाराए तो कभी खुद ही रूठ गया। कई बार लिखने पर भी मन सतुष्ट नहीं हुआ और निरंतर कुछ नया लिखने मन बनता रहता है। अजीब सी बेचैनी जो न जाने क्या करवाएगी और कितना कुछ कर गुजर जाने की तमन्ना लिए निकले हैं इन सफरों, जहां उम्मीद और विश्वास दोनों कायम हैं जो अर्जुन के भांति लक्ष्य को भेद देंगे । मुझे अभी अपने जीवन में बहुत कुछ करना है किसी के सपनों को पूरा करना हैं । अब तो बस मेरा एक ही लक्ष्य हैं कि मैं बस उसके सपने पूरें करू।

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