Modi के सुझाव पर यूनिवर्सिटी का नाम बदला गया

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दुनिया के सबसे बड़े क्रिकेट स्टेडियम के नाम परिवर्तन के दो दिन बाद, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सिफारिश पर पंडित दीनदयाल पेट्रोलियम यूनिवर्सिटी (पीडीपीयू) का नाम बदलकर पंडित दीनदयाल एनर्जी यूनिवर्सिटी (पीडीईयू) कर दिया गया है। पीडीपीयू के बड़े विजन का प्रतिनिधित्व करने के लिए पेट्रोलियम शब्द को एनर्जी (ऊर्जा) के साथ बदलने के लिए प्रधानमंत्री की सिफारिश के बाद, गुजरात सरकार ने पिछले सप्ताह एक राजपत्र के माध्यम से अधिसूचित किया कि पीडीपीयू का नाम बदलकर पंडित दीनदयाल एनर्जी यूनिवर्सिटी (पीडीईयू) कर दिया गया है।

यूनिवर्सिटी की वेबसाइट ने अधिसूचना के बाद अपने होमपेज पर आवश्यक बदलाव भी किए हैं।

प्रधानमंत्री ने पिछले साल दीक्षांत समारोह के दौरान कहा था, “पीडीपीयू ने पिछले एक दशक में अपना दायरा पूरे ऊर्जा क्षेत्र और अन्य क्षेत्रों में बढ़ाया है। पीडीपीयू की प्रगति को देखते हुए, मैं गुजरात सरकार से अपील करता हूं कि, इसे देखें, अगर कानून में संशोधन की जरूरत है, तो बेहतर होगा कि पेट्रोलियम यूनिवर्सिटी की जगह इसका नाम एनर्जी यूनिवर्सिटी में बदला जाए, क्योंकि इसका विजन और दायरा बड़ा होने जा रहा है।”

प्रधानमंत्री ने तब कहा था कि पेट्रोलियम यूनिवर्सिटी की अवधारणा उनकी अपनी थी, लेकिन अब इसे बढ़ाना होगा और पूरे ऊर्जा क्षेत्र को इसके साथ जोड़ा जाना है।

न्यूुज स्त्रोत आईएएनएस

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बहुत ही मुश्किल है अपने बारे में लिखना । इसलिए ज्यादा कुछ नहीं, मैं बहुत ही सरल व्यतित्व का व्यक्ति हूं । खुशमिजाज हूं ए इसलिए चेहरे पर हमेशा खुशी रहती हैए और मुझे अकेला रहना ज्यादा पंसद है। मेरा स्वभाव है कि मेरी बजह से किसी का कोई नुकसान नहीं होना चाहिए और ना ही किसी का दिल दुखना चाहिए। चाहे वो व्यक्ति अच्छा हो या बुरा। मेरे इस स्वभाव के कारण कभी कभी मुझे खामियाजा भी भुगतान पड़ता है। मैं अक्सर उनके बारे में सोचकर भुला देता हूं क्योंकि खुश रहने का हुनर सिर्फ मेरे पास है। मेरी अपनी विचारए विचारधारा है जिसे में अभिव्यक्त करता रहता हूं । जिन लोगों के विचारों से कभी प्रभावित भी होता हूं तो उन्हें फोलो कर लेता हूं । अभी सफर की शुरुआत है मैने कंप्यूटर ऑफ माटर्स की डिग्री हासिल की है और इस मीडीया क्षेत्र में अभी नया हूं। मगर मुझे अब इस क्षेत्र में काम करना अच्छा लग रहा है। और फिर इसी में काम करने का मन बना लेना दूसरों के लिये अश्चर्य पूर्ण होगा। लेकिन इससे पहले और आज भी ब्लागर ने एक मंच दिया चिठ्ठा के रुप में, जहां बिना रोक टोक के आसानी से सबकुछ लिखा या बताया जा सका। कभी कभी मन में उठ रही बातों या भावों को शब्दों में पिरोयाए उनमें खुद की और दूसरों की कहानी कही। कभी उनके द्वारा किसी को पुकाराए तो कभी खुद ही रूठ गया। कई बार लिखने पर भी मन सतुष्ट नहीं हुआ और निरंतर कुछ नया लिखने मन बनता रहता है। अजीब सी बेचैनी जो न जाने क्या करवाएगी और कितना कुछ कर गुजर जाने की तमन्ना लिए निकले हैं इन सफरों, जहां उम्मीद और विश्वास दोनों कायम हैं जो अर्जुन के भांति लक्ष्य को भेद देंगे । मुझे अभी अपने जीवन में बहुत कुछ करना है किसी के सपनों को पूरा करना हैं । अब तो बस मेरा एक ही लक्ष्य हैं कि मैं बस उसके सपने पूरें करू।

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