केंद्रीय मंत्री स्मृति ईरानी ने राम मंदिर भूमि पूजन के दिन अशोक सिंघल को याद किया

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केंद्रीय मंत्री स्मृति ईरानी ने अयोध्या में राम मंदिर के भूमि पूजन के मौके पर विहिप के फायरब्रांड नेता और राम मंदिर आंदोलन के शिल्पकार दिवंगत अशोक सिंघल को याद किया। स्मृति ईरानी ने बुधवार को ट्वीट पर अशोक सिंघल की तस्वीर शेयर करते हुए उन्हें नमन किया है। स्मृति ईरानी के तस्वीर शेयर करने पर समर्थकों ने जयश्री राम का कमेंट किया। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी बुधवार को अयोध्या में भगवान श्रीराम के मंदिर के लिए भूमि पूजन कर रहे हैं। 15 सितंबर, 1926 को आगरा में जन्मे सिंघल राम मंदिर आंदोलन के शिल्पकार माने जाते हैं। वह विश्व हिंदू परिषद (विहिप) के 20 वर्षों तक कार्यकारी अध्यक्ष रहे। विहिप को पहचान दिलाने में अशोक सिंघल का बड़ा योगदान रहा। बनारस हिंदू विश्वविद्यालय से इंजीनियरिंग की पढ़ाई करने वाले अशोक सिंघल आरएसएस से जुड़कर पूर्णकालिक प्रचारक बने। फिर वह विश्व हिंदू परिषद के नेतृत्वकर्ता बने।

वर्ष 1984 में दिल्ली के विज्ञान भवन में आयोजित जिस धर्म संसद में राम जन्मभूमि आंदोलन की रणनीति बनी, उसके मुख्य संचालनकर्ता अशोक सिंघल ही थे। बताया जाता है कि उन्होंने ही राम मंदिर आंदोलन से कारसेवकों को जोड़ा। 1992 में विवादित ढांचा तोड़ने के दौरान कारसेवकों का नेतृत्व अशोक सिंघल ने ही किया था। अशोक सिंघल का 2015 में निधन हो गया।

न्यूज स्त्रोत आईएएनएस

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बहुत ही मुश्किल है अपने बारे में लिखना । इसलिए ज्यादा कुछ नहीं, मैं बहुत ही सरल व्यतित्व का व्यक्ति हूं । खुशमिजाज हूं ए इसलिए चेहरे पर हमेशा खुशी रहती हैए और मुझे अकेला रहना ज्यादा पंसद है। मेरा स्वभाव है कि मेरी बजह से किसी का कोई नुकसान नहीं होना चाहिए और ना ही किसी का दिल दुखना चाहिए। चाहे वो व्यक्ति अच्छा हो या बुरा। मेरे इस स्वभाव के कारण कभी कभी मुझे खामियाजा भी भुगतान पड़ता है। मैं अक्सर उनके बारे में सोचकर भुला देता हूं क्योंकि खुश रहने का हुनर सिर्फ मेरे पास है। मेरी अपनी विचारए विचारधारा है जिसे में अभिव्यक्त करता रहता हूं । जिन लोगों के विचारों से कभी प्रभावित भी होता हूं तो उन्हें फोलो कर लेता हूं । अभी सफर की शुरुआत है मैने कंप्यूटर ऑफ माटर्स की डिग्री हासिल की है और इस मीडीया क्षेत्र में अभी नया हूं। मगर मुझे अब इस क्षेत्र में काम करना अच्छा लग रहा है। और फिर इसी में काम करने का मन बना लेना दूसरों के लिये अश्चर्य पूर्ण होगा। लेकिन इससे पहले और आज भी ब्लागर ने एक मंच दिया चिठ्ठा के रुप में, जहां बिना रोक टोक के आसानी से सबकुछ लिखा या बताया जा सका। कभी कभी मन में उठ रही बातों या भावों को शब्दों में पिरोयाए उनमें खुद की और दूसरों की कहानी कही। कभी उनके द्वारा किसी को पुकाराए तो कभी खुद ही रूठ गया। कई बार लिखने पर भी मन सतुष्ट नहीं हुआ और निरंतर कुछ नया लिखने मन बनता रहता है। अजीब सी बेचैनी जो न जाने क्या करवाएगी और कितना कुछ कर गुजर जाने की तमन्ना लिए निकले हैं इन सफरों, जहां उम्मीद और विश्वास दोनों कायम हैं जो अर्जुन के भांति लक्ष्य को भेद देंगे । मुझे अभी अपने जीवन में बहुत कुछ करना है किसी के सपनों को पूरा करना हैं । अब तो बस मेरा एक ही लक्ष्य हैं कि मैं बस उसके सपने पूरें करू।

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