संघ प्रमुख: स्वदेशी का मतलब विदेशी वस्तुओं का बहिष्कार नहीं

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राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के सर संघचालक मोहन भागवत ने आत्मनिर्भर भारत अभियान पर बोलते हुए विकास के तीसरे मॉडल की जरूरत पर जोर दिया है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आत्म निर्भर भारत की बात इसी के आधार पर की है। संघ प्रमुख ने प्रो राजेंद्र गुप्ता की दो पुस्तकों का बुधवार को ऑनलाइन विमोचन करते हुए स्वदेशी मुहिम और विदेशी वस्तुओं के बहिष्कार के मुद्दों पर भी चर्चा की। संघ प्रमुख ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि स्वदेशी का मतलब विदेशी वस्तुओं का बहिष्कार नहीं है। लेकिन विदेशी सामानों को अपनी शर्तों पर हमें लेना है।

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सर संघचालक मोहन भागवत ने कोरोना के दौर में नए विकास मॉडल पर भी जोर दिया। उन्होंने कहा कि देश की आजादी के बाद जिस तरह की आर्थिक नीतियों की जरूरत थी उस तरह की नीतियां नहीं बन सकीं। उस समय पाश्चात्य देशों के मॉडल का अंधाधुंध अनुकरण किया गया। भारत के अनुकूल नीति नहीं तैयार हुई। हालांकि संघ प्रमुख ने मौजूदा समय इस दिशा में हो रहे प्रयासों पर संतोष जाहिर किया।

संघ प्रमुख मोहन भागवत ने कहा कि पहले एक मॉडल में कहा गया कि मनुष्य की सत्ता है और दूसरा कहता है कि समाज की सत्ता है। ऐसा विचार आया कि दुनिया को एक वैश्विक बाजार बनना चाहिए। लेकिन कोरोना काल की परिस्थितियों में अब विकास के तीसरे मॉडल की जरूरत है जो मूल्यों पर आधारित हो।

न्यूज सत्रोत आईएएनएस

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बहुत ही मुश्किल है अपने बारे में लिखना । इसलिए ज्यादा कुछ नहीं, मैं बहुत ही सरल व्यतित्व का व्यक्ति हूं । खुशमिजाज हूं ए इसलिए चेहरे पर हमेशा खुशी रहती हैए और मुझे अकेला रहना ज्यादा पंसद है। मेरा स्वभाव है कि मेरी बजह से किसी का कोई नुकसान नहीं होना चाहिए और ना ही किसी का दिल दुखना चाहिए। चाहे वो व्यक्ति अच्छा हो या बुरा। मेरे इस स्वभाव के कारण कभी कभी मुझे खामियाजा भी भुगतान पड़ता है। मैं अक्सर उनके बारे में सोचकर भुला देता हूं क्योंकि खुश रहने का हुनर सिर्फ मेरे पास है। मेरी अपनी विचारए विचारधारा है जिसे में अभिव्यक्त करता रहता हूं । जिन लोगों के विचारों से कभी प्रभावित भी होता हूं तो उन्हें फोलो कर लेता हूं । अभी सफर की शुरुआत है मैने कंप्यूटर ऑफ माटर्स की डिग्री हासिल की है और इस मीडीया क्षेत्र में अभी नया हूं। मगर मुझे अब इस क्षेत्र में काम करना अच्छा लग रहा है। और फिर इसी में काम करने का मन बना लेना दूसरों के लिये अश्चर्य पूर्ण होगा। लेकिन इससे पहले और आज भी ब्लागर ने एक मंच दिया चिठ्ठा के रुप में, जहां बिना रोक टोक के आसानी से सबकुछ लिखा या बताया जा सका। कभी कभी मन में उठ रही बातों या भावों को शब्दों में पिरोयाए उनमें खुद की और दूसरों की कहानी कही। कभी उनके द्वारा किसी को पुकाराए तो कभी खुद ही रूठ गया। कई बार लिखने पर भी मन सतुष्ट नहीं हुआ और निरंतर कुछ नया लिखने मन बनता रहता है। अजीब सी बेचैनी जो न जाने क्या करवाएगी और कितना कुछ कर गुजर जाने की तमन्ना लिए निकले हैं इन सफरों, जहां उम्मीद और विश्वास दोनों कायम हैं जो अर्जुन के भांति लक्ष्य को भेद देंगे । मुझे अभी अपने जीवन में बहुत कुछ करना है किसी के सपनों को पूरा करना हैं । अब तो बस मेरा एक ही लक्ष्य हैं कि मैं बस उसके सपने पूरें करू।

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