एसजी गेंद से उमेश को भी शिकायत, जानिए !

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भारतीय क्रिकेट टीम के कप्तान विराट कोहली और गेंदबाज रविचंद्रन अश्विन के बाद अब तेज गेंदबाज उमेश यादव ने भी एसजी गेंद पर सवाल खड़े किए हैं। उमेश ने कहा है कि यह गेंद काफी जल्दी नरम पड़ जाती है जिससे विकेट लेने की संभावनाएं कम हो जाती हैं। उमेश से पहले कोहली ने कहा था कि एसजी गेंद की क्वालिटी में गिरावट आई है और इसी कारण सभी जगह ड्यूक गेंद का इस्तेमाल किया जाना चाहिए।

उमेश ने यहां राजीव गांधी अंतर्राष्ट्रीय स्टेडियम में वेस्टइंडीज के खिलाफ खेले जा रहे दूसरे टेस्ट मैच के पहले दिन शुक्रवार को तीन विकेट अपने नाम किए।

मैच के बाद उमेश ने संवाददाता सम्मेलन में कहा, “एसजी गेंद 20 ओवर के बाद काफी नरम पड़ जाती है जिससे बाद में आने वाले बल्लेबाजों को खेलने में परेशानी नहीं होती। निचले क्रम के बल्लेबाज जानते हैं कि न तो गेंद स्विंग करेगी और न ही इससे रिवर्स स्विंग होगी। आपको कुछ अलग होने का इंतजार करना पड़ता है और लगातार कोशिश करनी पड़ती है। लेकिन आप इतने बड़े मैदान पर ज्यादा कुछ नहीं कर सकते। यहां एक-दो रन आते रहते हैं।”

उन्होंने कहा, “आप सिर्फ इतना कर सकते हैं कि एक ही स्थान पर गेंदबाजी करें लेकिन फिर आपको लगता है कि कुछ हो नहीं रहा है। गेंद भी स्विंग नहीं कर रही है। जब मध्यक्रम और निचले क्रम के बल्लेबाज आते हैं तो गेंद नरम हो जाती है। यह तेजी से नहीं आती इसी वजह से बल्लेबाजी आसान हो जाती है।”

न्यूज स्त्रोत आईएएनएस


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बहुत ही मुश्किल है अपने बारे में लिखना । इसलिए ज्यादा कुछ नहीं, मैं बहुत ही सरल व्यतित्व का व्यक्ति हूं । खुशमिजाज हूं ए इसलिए चेहरे पर हमेशा खुशी रहती हैए और मुझे अकेला रहना ज्यादा पंसद है। मेरा स्वभाव है कि मेरी बजह से किसी का कोई नुकसान नहीं होना चाहिए और ना ही किसी का दिल दुखना चाहिए। चाहे वो व्यक्ति अच्छा हो या बुरा। मेरे इस स्वभाव के कारण कभी कभी मुझे खामियाजा भी भुगतान पड़ता है। मैं अक्सर उनके बारे में सोचकर भुला देता हूं क्योंकि खुश रहने का हुनर सिर्फ मेरे पास है। मेरी अपनी विचारए विचारधारा है जिसे में अभिव्यक्त करता रहता हूं । जिन लोगों के विचारों से कभी प्रभावित भी होता हूं तो उन्हें फोलो कर लेता हूं । अभी सफर की शुरुआत है मैने कंप्यूटर ऑफ माटर्स की डिग्री हासिल की है और इस मीडीया क्षेत्र में अभी नया हूं। मगर मुझे अब इस क्षेत्र में काम करना अच्छा लग रहा है। और फिर इसी में काम करने का मन बना लेना दूसरों के लिये अश्चर्य पूर्ण होगा। लेकिन इससे पहले और आज भी ब्लागर ने एक मंच दिया चिठ्ठा के रुप में, जहां बिना रोक टोक के आसानी से सबकुछ लिखा या बताया जा सका। कभी कभी मन में उठ रही बातों या भावों को शब्दों में पिरोयाए उनमें खुद की और दूसरों की कहानी कही। कभी उनके द्वारा किसी को पुकाराए तो कभी खुद ही रूठ गया। कई बार लिखने पर भी मन सतुष्ट नहीं हुआ और निरंतर कुछ नया लिखने मन बनता रहता है। अजीब सी बेचैनी जो न जाने क्या करवाएगी और कितना कुछ कर गुजर जाने की तमन्ना लिए निकले हैं इन सफरों, जहां उम्मीद और विश्वास दोनों कायम हैं जो अर्जुन के भांति लक्ष्य को भेद देंगे । मुझे अभी अपने जीवन में बहुत कुछ करना है किसी के सपनों को पूरा करना हैं । अब तो बस मेरा एक ही लक्ष्य हैं कि मैं बस उसके सपने पूरें करू।

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