‘मी टू’ मामले में अकबर के बचाव में उतरी उमा भारती, जानिए !

0
99

‘मी टू’ अभियान के तहत विदेश राज्य मंत्री एम जे अकबर पर महिलाओं द्वारा लगाए गए यौन उत्पीड़न के आरोपों पर केंद्रीय मंत्री उमा भारती ने अकबर का बचाव किया है। उमा ने यह मामला अकबर और महिलाओं के बीच का बताया है।

यहां विजयराजे सिंधिया ‘राजमाता’ की जन्म शताब्दी के मौके पर आयोजित कार्यक्रम में हिस्सा लेने पहुंची उमा ने संवाददाताओं द्वारा पूछे गए सवाल पर कहा, “वे इस मामले पर कुछ नहीं कहना चाहती। अकबर से जुड़ा मामला तब का है जब वे केंद्र सरकार में मंत्री नहीं थे। यह मामला पूरी तरह महिला और अकबर के बीच है। लिहाजा वे इस पर कुछ नहीं कह सकती।”

पत्रकारों ने जब उमा से पूछा कि आप हमेशा महिलाओं के हितों की बात करती रही है, लेकिन इस मामले पर पीछे क्यों हट रही हैं। केंद्रीय मंत्री इसके बाद भी इस पर कुछ नहीं बोली और चुप्पी साधे रखी।

न्यूज स्त्रोत आईएएनएस


SHARE
Previous articleप्रो कबड्डी लीग-6 : दिल्ली ने पुनेरी को 41-37 से हराया
Next articleस्वच्छ वायु कार्यक्रम लागू हो : ग्रीनपीस इंडिया
बहुत ही मुश्किल है अपने बारे में लिखना । इसलिए ज्यादा कुछ नहीं, मैं बहुत ही सरल व्यतित्व का व्यक्ति हूं । खुशमिजाज हूं ए इसलिए चेहरे पर हमेशा खुशी रहती हैए और मुझे अकेला रहना ज्यादा पंसद है। मेरा स्वभाव है कि मेरी बजह से किसी का कोई नुकसान नहीं होना चाहिए और ना ही किसी का दिल दुखना चाहिए। चाहे वो व्यक्ति अच्छा हो या बुरा। मेरे इस स्वभाव के कारण कभी कभी मुझे खामियाजा भी भुगतान पड़ता है। मैं अक्सर उनके बारे में सोचकर भुला देता हूं क्योंकि खुश रहने का हुनर सिर्फ मेरे पास है। मेरी अपनी विचारए विचारधारा है जिसे में अभिव्यक्त करता रहता हूं । जिन लोगों के विचारों से कभी प्रभावित भी होता हूं तो उन्हें फोलो कर लेता हूं । अभी सफर की शुरुआत है मैने कंप्यूटर ऑफ माटर्स की डिग्री हासिल की है और इस मीडीया क्षेत्र में अभी नया हूं। मगर मुझे अब इस क्षेत्र में काम करना अच्छा लग रहा है। और फिर इसी में काम करने का मन बना लेना दूसरों के लिये अश्चर्य पूर्ण होगा। लेकिन इससे पहले और आज भी ब्लागर ने एक मंच दिया चिठ्ठा के रुप में, जहां बिना रोक टोक के आसानी से सबकुछ लिखा या बताया जा सका। कभी कभी मन में उठ रही बातों या भावों को शब्दों में पिरोयाए उनमें खुद की और दूसरों की कहानी कही। कभी उनके द्वारा किसी को पुकाराए तो कभी खुद ही रूठ गया। कई बार लिखने पर भी मन सतुष्ट नहीं हुआ और निरंतर कुछ नया लिखने मन बनता रहता है। अजीब सी बेचैनी जो न जाने क्या करवाएगी और कितना कुछ कर गुजर जाने की तमन्ना लिए निकले हैं इन सफरों, जहां उम्मीद और विश्वास दोनों कायम हैं जो अर्जुन के भांति लक्ष्य को भेद देंगे । मुझे अभी अपने जीवन में बहुत कुछ करना है किसी के सपनों को पूरा करना हैं । अब तो बस मेरा एक ही लक्ष्य हैं कि मैं बस उसके सपने पूरें करू।

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here