जम्मू एंव कश्मीर मुठभेड़ में मारे गए लश्कर के 2 आतंकवादी

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दक्षिण कश्मीर के संगम बिजबेहरा में शनिवार को जम्मू एवं कश्मीर पुलिस और केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (सीआरपीएफ) और सेना की संयुक्त कार्रवाई में लश्कर-ए-तैयबा के दो आतंकवादी मारे गए। पुलिस के अनुसार, उनके पास से हथियार और गोला-बारूद बरामद किए गए हैं। मारे गए दोनों शख्स स्थानीय आतंकवादी थे।

उनकी पहचान नवीद भट्ट उर्फ फुरकान और अकीब यासीन भट के रूप में हुई है। दोनों कैमोह के निवासी थे।

सूत्रों ने कहा कि सुरक्षा बलों के पास आतंकवादियों की मौजूदगी की सूचना थी, जिससे वहां मुठभेड़ शुरू हुई।

पुलिस और सेना की एक संयुक्त टीम ने वहां घेराबंदी कर तलाशी अभियान चलाया, जिसके बाद आतंकवादियों और सुरक्षा बलों के बीच मुठभेड़ शुरू हुई।

इस सप्ताह हुई यह दूसरी बड़ी मुठभेड़ है।

ज्ञात हो कि सुरक्षाबलों ने बुधवार (19 फरवरी) को दक्षिण कश्मीर के पुलवामा जिले के अवंतीपोरा में हिजबुल मुजाहिदीन के एक खतरनाक शीर्ष कमांडर सहित तीन आतंकवादियों को मार गिराया था।

न्यूज स्त्रोत आईएएनएस

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बहुत ही मुश्किल है अपने बारे में लिखना । इसलिए ज्यादा कुछ नहीं, मैं बहुत ही सरल व्यतित्व का व्यक्ति हूं । खुशमिजाज हूं ए इसलिए चेहरे पर हमेशा खुशी रहती हैए और मुझे अकेला रहना ज्यादा पंसद है। मेरा स्वभाव है कि मेरी बजह से किसी का कोई नुकसान नहीं होना चाहिए और ना ही किसी का दिल दुखना चाहिए। चाहे वो व्यक्ति अच्छा हो या बुरा। मेरे इस स्वभाव के कारण कभी कभी मुझे खामियाजा भी भुगतान पड़ता है। मैं अक्सर उनके बारे में सोचकर भुला देता हूं क्योंकि खुश रहने का हुनर सिर्फ मेरे पास है। मेरी अपनी विचारए विचारधारा है जिसे में अभिव्यक्त करता रहता हूं । जिन लोगों के विचारों से कभी प्रभावित भी होता हूं तो उन्हें फोलो कर लेता हूं । अभी सफर की शुरुआत है मैने कंप्यूटर ऑफ माटर्स की डिग्री हासिल की है और इस मीडीया क्षेत्र में अभी नया हूं। मगर मुझे अब इस क्षेत्र में काम करना अच्छा लग रहा है। और फिर इसी में काम करने का मन बना लेना दूसरों के लिये अश्चर्य पूर्ण होगा। लेकिन इससे पहले और आज भी ब्लागर ने एक मंच दिया चिठ्ठा के रुप में, जहां बिना रोक टोक के आसानी से सबकुछ लिखा या बताया जा सका। कभी कभी मन में उठ रही बातों या भावों को शब्दों में पिरोयाए उनमें खुद की और दूसरों की कहानी कही। कभी उनके द्वारा किसी को पुकाराए तो कभी खुद ही रूठ गया। कई बार लिखने पर भी मन सतुष्ट नहीं हुआ और निरंतर कुछ नया लिखने मन बनता रहता है। अजीब सी बेचैनी जो न जाने क्या करवाएगी और कितना कुछ कर गुजर जाने की तमन्ना लिए निकले हैं इन सफरों, जहां उम्मीद और विश्वास दोनों कायम हैं जो अर्जुन के भांति लक्ष्य को भेद देंगे । मुझे अभी अपने जीवन में बहुत कुछ करना है किसी के सपनों को पूरा करना हैं । अब तो बस मेरा एक ही लक्ष्य हैं कि मैं बस उसके सपने पूरें करू।

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