Trump संयुक्त राष्ट्र महासभा की बैठक में व्यक्तिगत रूप से उपस्थित नहीं होंगे

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अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप अगले हफ्ते होने वाली संयुक्त राष्ट्र महासभा (यूएनजीए) की बैठक में व्यक्तिगत रूप से शामिल नहीं होंगे। व्हाइट हाउस चीफ ऑफ स्टाफ मार्क मिडॉज ने यह जानकारी दी। हिल न्यूज वेबसाइट की रिपोर्ट के अनुसार, विस्कोसिन में गुरुवार को ट्रंप की कैंपेन रैली के लिए जाने के दौरान मिडॉज ने पत्रकारों से कहा कि ट्रंप न्यूयार्क में विश्व नेताओं के सालाना जमावड़े में शामिल नहीं होंगे।

दरअसल मौजूदा कोरोनावायरस महामारी के चलते इतिहास में पहली बार यह बैठक वर्चुअली आयोजित होगी।

नेता वर्चुअली मुलाकात करेंगे और कईयों ने तो पहले ही अपने रिकॉर्डेड संबोधन दे दिए हैं।

लेकिन ट्रंप ने अभी तक अपने भाषण को जमा नहीं करवाया है।

यूएनजीए को लेकर ‘फाइनल अपडेट’ वाले

इमेल से इसकी पुष्टि भी हो गई। पॉलिटिको न्यूज ने इस इमेल तक पहुंच स्थापित की, जिसमें कहा गया कि न ही राष्ट्रपति ट्रंप और न ही विदेश मंत्री माइक पोम्पियो न्यूयार्क की यात्रा करेंगे।

न्यूज स्त्रोत आईएएनएस

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बहुत ही मुश्किल है अपने बारे में लिखना । इसलिए ज्यादा कुछ नहीं, मैं बहुत ही सरल व्यतित्व का व्यक्ति हूं । खुशमिजाज हूं ए इसलिए चेहरे पर हमेशा खुशी रहती हैए और मुझे अकेला रहना ज्यादा पंसद है। मेरा स्वभाव है कि मेरी बजह से किसी का कोई नुकसान नहीं होना चाहिए और ना ही किसी का दिल दुखना चाहिए। चाहे वो व्यक्ति अच्छा हो या बुरा। मेरे इस स्वभाव के कारण कभी कभी मुझे खामियाजा भी भुगतान पड़ता है। मैं अक्सर उनके बारे में सोचकर भुला देता हूं क्योंकि खुश रहने का हुनर सिर्फ मेरे पास है। मेरी अपनी विचारए विचारधारा है जिसे में अभिव्यक्त करता रहता हूं । जिन लोगों के विचारों से कभी प्रभावित भी होता हूं तो उन्हें फोलो कर लेता हूं । अभी सफर की शुरुआत है मैने कंप्यूटर ऑफ माटर्स की डिग्री हासिल की है और इस मीडीया क्षेत्र में अभी नया हूं। मगर मुझे अब इस क्षेत्र में काम करना अच्छा लग रहा है। और फिर इसी में काम करने का मन बना लेना दूसरों के लिये अश्चर्य पूर्ण होगा। लेकिन इससे पहले और आज भी ब्लागर ने एक मंच दिया चिठ्ठा के रुप में, जहां बिना रोक टोक के आसानी से सबकुछ लिखा या बताया जा सका। कभी कभी मन में उठ रही बातों या भावों को शब्दों में पिरोयाए उनमें खुद की और दूसरों की कहानी कही। कभी उनके द्वारा किसी को पुकाराए तो कभी खुद ही रूठ गया। कई बार लिखने पर भी मन सतुष्ट नहीं हुआ और निरंतर कुछ नया लिखने मन बनता रहता है। अजीब सी बेचैनी जो न जाने क्या करवाएगी और कितना कुछ कर गुजर जाने की तमन्ना लिए निकले हैं इन सफरों, जहां उम्मीद और विश्वास दोनों कायम हैं जो अर्जुन के भांति लक्ष्य को भेद देंगे । मुझे अभी अपने जीवन में बहुत कुछ करना है किसी के सपनों को पूरा करना हैं । अब तो बस मेरा एक ही लक्ष्य हैं कि मैं बस उसके सपने पूरें करू।

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