ट्रंप ने औपचारिक रूप से कार्यवाहक खुफिया प्रमुख नियुक्त किया

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अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने औपचारिक रूप से रिचर्ड ग्रेनेल को राष्ट्रीय खुफिया निदेशक के रूप में नियुक्त किया है, जो जर्मनी में अमेरिका के राजदूत हैं। व्हाइट हाउस ने एक बयान में यह जानकारी दी। समाचार एजेंसी सिन्हुआ के मुताबिक, व्हाइट हाउस की प्रेस सचिव स्टेफनी ग्रिशम ने गुरुवार को एक बयान में कहा, “ग्रेनेल एक इंटेलीजेंस कम्युनिटी के प्रमुख के रूप में एक गैर-राजनीतिक, गैर-पक्षपातपूर्ण दृष्टिकोण के लिए प्रतिबद्ध है, जिस पर हमारी सलामती और सुरक्षा निर्भर करती है।”

उन्होंने कहा, “राष्ट्रपति को पूरा भरोसा है कि राजदूत ग्रेनेल अपने नए कर्तव्यों का निर्वाह बखूबी करेंगे।”

ग्रेनेल ने अप्रैल 2018 से जर्मनी में अमेरिकी राजदूत के रूप में कार्य कर रहे हैं।

वह उस भूमिका को बरकरार रखेंगे, क्योंकि वह केवल कार्यवाहक आधार पर इंटेलीजेंस (खुफिया) कम्युनिटी का नेतृत्व कर रहे हैं।

ट्रंप ने बुधवार को ट्विटर के माध्यम से घोषणा की थी कि वह ग्रेनेल को इंटेलीजेंस की जिम्मेदारी सौंपेंगे।

न्यूज स्त्रोत आईएएनएस

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बहुत ही मुश्किल है अपने बारे में लिखना । इसलिए ज्यादा कुछ नहीं, मैं बहुत ही सरल व्यतित्व का व्यक्ति हूं । खुशमिजाज हूं ए इसलिए चेहरे पर हमेशा खुशी रहती हैए और मुझे अकेला रहना ज्यादा पंसद है। मेरा स्वभाव है कि मेरी बजह से किसी का कोई नुकसान नहीं होना चाहिए और ना ही किसी का दिल दुखना चाहिए। चाहे वो व्यक्ति अच्छा हो या बुरा। मेरे इस स्वभाव के कारण कभी कभी मुझे खामियाजा भी भुगतान पड़ता है। मैं अक्सर उनके बारे में सोचकर भुला देता हूं क्योंकि खुश रहने का हुनर सिर्फ मेरे पास है। मेरी अपनी विचारए विचारधारा है जिसे में अभिव्यक्त करता रहता हूं । जिन लोगों के विचारों से कभी प्रभावित भी होता हूं तो उन्हें फोलो कर लेता हूं । अभी सफर की शुरुआत है मैने कंप्यूटर ऑफ माटर्स की डिग्री हासिल की है और इस मीडीया क्षेत्र में अभी नया हूं। मगर मुझे अब इस क्षेत्र में काम करना अच्छा लग रहा है। और फिर इसी में काम करने का मन बना लेना दूसरों के लिये अश्चर्य पूर्ण होगा। लेकिन इससे पहले और आज भी ब्लागर ने एक मंच दिया चिठ्ठा के रुप में, जहां बिना रोक टोक के आसानी से सबकुछ लिखा या बताया जा सका। कभी कभी मन में उठ रही बातों या भावों को शब्दों में पिरोयाए उनमें खुद की और दूसरों की कहानी कही। कभी उनके द्वारा किसी को पुकाराए तो कभी खुद ही रूठ गया। कई बार लिखने पर भी मन सतुष्ट नहीं हुआ और निरंतर कुछ नया लिखने मन बनता रहता है। अजीब सी बेचैनी जो न जाने क्या करवाएगी और कितना कुछ कर गुजर जाने की तमन्ना लिए निकले हैं इन सफरों, जहां उम्मीद और विश्वास दोनों कायम हैं जो अर्जुन के भांति लक्ष्य को भेद देंगे । मुझे अभी अपने जीवन में बहुत कुछ करना है किसी के सपनों को पूरा करना हैं । अब तो बस मेरा एक ही लक्ष्य हैं कि मैं बस उसके सपने पूरें करू।

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