ट्रेड फेयर में जीएसटी के मुद्दों के लिए होगा सहायता केंद्र

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वस्तु एवं सेवा कर नेटवर्क (जीएसटीएन) ने गुरुवार को बताया कि इंडिया इंटरनेशनल ट्रेड फेयर (आईआईटीएफ) में विदेशी कंपनी समेत दिल्ली से बाहर पंजीकृत देसी कंपनियों को उनकी जीएसटी संबंधी बाध्यताओं को पूरा करने में मदद के लिए सहायता केंद्र बनाए जाएंगे। जीएसटीएन ने कहा कि यह फैसला इसलिए लिया गया है क्योंकि प्रगति मैदान में 14 नवंबर से लगने वाले ट्रेड फेयर में देश-विदेश की कई कंपनियां आने वाली हैं।

इनमें से अधिकांश कारोबारी या तो अनिवासी करदाता की श्रेणी (विदेशी कंपनियां जो भारत में कहीं भी पंजीकृत नहीं हैं।) या अनौपचारिक करदाता (दिल्ली से बाहर पंजीकृत) हैं।

जीएसटीएन के सीईओ प्रकाश कुमार ने कहा, “हम आईआईटीएफ-2018 में शामिल होने के लिए दिल्ली आनेवाले सभी विदेशी कारोबारियों को आश्वस्त करना चाहते हैं कि उनको जीएसटी के संबंध में सभी प्रकार की तकनीकी व प्रक्रियात्मक सहायता प्रदान की जाएगी। किसी भी करदाता को व्यावहारिक मदद करने के लिए हमारा सहायता केंद्र मेला स्थल में मौजूदा रहेगा।”

हालांकि उन्होंने दिल्ली के बाहर से आने वाली सभी कंपनियों को यहां आने का इंतजार नहीं करने, बल्कि आने से पहले ही जीएसटी पोर्टल पर खुद को शीघ्र पंजीकृत करने की सलाह दी है, ताकि उनको आखिर में कोई विलंब न हो जिससे ट्रेड फेयर के अवसर से वे वंचित रह जाएं।

न्यूज स्त्रोत आईएएनएस


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बहुत ही मुश्किल है अपने बारे में लिखना । इसलिए ज्यादा कुछ नहीं, मैं बहुत ही सरल व्यतित्व का व्यक्ति हूं । खुशमिजाज हूं ए इसलिए चेहरे पर हमेशा खुशी रहती हैए और मुझे अकेला रहना ज्यादा पंसद है। मेरा स्वभाव है कि मेरी बजह से किसी का कोई नुकसान नहीं होना चाहिए और ना ही किसी का दिल दुखना चाहिए। चाहे वो व्यक्ति अच्छा हो या बुरा। मेरे इस स्वभाव के कारण कभी कभी मुझे खामियाजा भी भुगतान पड़ता है। मैं अक्सर उनके बारे में सोचकर भुला देता हूं क्योंकि खुश रहने का हुनर सिर्फ मेरे पास है। मेरी अपनी विचारए विचारधारा है जिसे में अभिव्यक्त करता रहता हूं । जिन लोगों के विचारों से कभी प्रभावित भी होता हूं तो उन्हें फोलो कर लेता हूं । अभी सफर की शुरुआत है मैने कंप्यूटर ऑफ माटर्स की डिग्री हासिल की है और इस मीडीया क्षेत्र में अभी नया हूं। मगर मुझे अब इस क्षेत्र में काम करना अच्छा लग रहा है। और फिर इसी में काम करने का मन बना लेना दूसरों के लिये अश्चर्य पूर्ण होगा। लेकिन इससे पहले और आज भी ब्लागर ने एक मंच दिया चिठ्ठा के रुप में, जहां बिना रोक टोक के आसानी से सबकुछ लिखा या बताया जा सका। कभी कभी मन में उठ रही बातों या भावों को शब्दों में पिरोयाए उनमें खुद की और दूसरों की कहानी कही। कभी उनके द्वारा किसी को पुकाराए तो कभी खुद ही रूठ गया। कई बार लिखने पर भी मन सतुष्ट नहीं हुआ और निरंतर कुछ नया लिखने मन बनता रहता है। अजीब सी बेचैनी जो न जाने क्या करवाएगी और कितना कुछ कर गुजर जाने की तमन्ना लिए निकले हैं इन सफरों, जहां उम्मीद और विश्वास दोनों कायम हैं जो अर्जुन के भांति लक्ष्य को भेद देंगे । मुझे अभी अपने जीवन में बहुत कुछ करना है किसी के सपनों को पूरा करना हैं । अब तो बस मेरा एक ही लक्ष्य हैं कि मैं बस उसके सपने पूरें करू।

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