टाइटन दुनिया की उभरती हुई चौथी लक्जरी कंपनी : रिपोर्ट

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घड़ी और जेवरात बनाने वाली टाइटन कंपनी दुनिया की सबसे तेज विकास दर वाली सुखसाधन की चौथी कंपनी बन गई है जिसकी मिश्रित सालाना विकास दर 2015-2017 के वित्त वर्षो के दौरान 19.7 फीसदी रही। यह जानकारी डेलॉयट ने बुधवार को जारी अपनी एक रिपोर्ट में कही।

टाइटन टाटा समूह और सरकारी कंपनी तमिलनाडु औद्योगिकी विकास निगम (टीआईडीसीओ) का संयुक्त उपक्रम है।

दुनिया की शीर्ष 100 सुखसाधन की कंपनियों में टाइटन 27वें पायदान पर है। डेलॉयट द्वारा तैयार इस सूची में देश की चार अन्य कंपनियां शीर्ष 100 कंपनियों में शामिल हैं। इनमें कल्याण ज्वेलर्स 35वें पायदान पर, पीसी ज्वलेर्स 40वें पायदान पर, जोयालुकास इंडिया प्राइवेट लिमिटेड 47वें स्थान पर और त्रिभुवनदास भीमजी झावेरी 87वें पायदान पर हैं।

रिपोर्ट के अनुसार, वित्त वर्ष 2017 में टाइटन कंपनी लिमिटेड की बिक्री में 23.6 फीसदी की वृद्धि हुई जबकि 2015 और 2017 के दौरान कंपनी की मिश्रित सालाना वृद्धि दर 19.7 फीसदी रही।

न्यूज स्त्रोत आईएएनएस


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बहुत ही मुश्किल है अपने बारे में लिखना । इसलिए ज्यादा कुछ नहीं, मैं बहुत ही सरल व्यतित्व का व्यक्ति हूं । खुशमिजाज हूं ए इसलिए चेहरे पर हमेशा खुशी रहती हैए और मुझे अकेला रहना ज्यादा पंसद है। मेरा स्वभाव है कि मेरी बजह से किसी का कोई नुकसान नहीं होना चाहिए और ना ही किसी का दिल दुखना चाहिए। चाहे वो व्यक्ति अच्छा हो या बुरा। मेरे इस स्वभाव के कारण कभी कभी मुझे खामियाजा भी भुगतान पड़ता है। मैं अक्सर उनके बारे में सोचकर भुला देता हूं क्योंकि खुश रहने का हुनर सिर्फ मेरे पास है। मेरी अपनी विचारए विचारधारा है जिसे में अभिव्यक्त करता रहता हूं । जिन लोगों के विचारों से कभी प्रभावित भी होता हूं तो उन्हें फोलो कर लेता हूं । अभी सफर की शुरुआत है मैने कंप्यूटर ऑफ माटर्स की डिग्री हासिल की है और इस मीडीया क्षेत्र में अभी नया हूं। मगर मुझे अब इस क्षेत्र में काम करना अच्छा लग रहा है। और फिर इसी में काम करने का मन बना लेना दूसरों के लिये अश्चर्य पूर्ण होगा। लेकिन इससे पहले और आज भी ब्लागर ने एक मंच दिया चिठ्ठा के रुप में, जहां बिना रोक टोक के आसानी से सबकुछ लिखा या बताया जा सका। कभी कभी मन में उठ रही बातों या भावों को शब्दों में पिरोयाए उनमें खुद की और दूसरों की कहानी कही। कभी उनके द्वारा किसी को पुकाराए तो कभी खुद ही रूठ गया। कई बार लिखने पर भी मन सतुष्ट नहीं हुआ और निरंतर कुछ नया लिखने मन बनता रहता है। अजीब सी बेचैनी जो न जाने क्या करवाएगी और कितना कुछ कर गुजर जाने की तमन्ना लिए निकले हैं इन सफरों, जहां उम्मीद और विश्वास दोनों कायम हैं जो अर्जुन के भांति लक्ष्य को भेद देंगे । मुझे अभी अपने जीवन में बहुत कुछ करना है किसी के सपनों को पूरा करना हैं । अब तो बस मेरा एक ही लक्ष्य हैं कि मैं बस उसके सपने पूरें करू।

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