लोकसभा के बाद अब राज्यसभा में पास हुए तीन श्रम विधेयक बिल

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संसद में मचे हंगामे के बीच आज यानि की बुधवार राज्यसभा में आज तीन लेबर कोड बिलों को पारित कर दिया गया है।इन तीनों बिलों को कल लोकसभा में पारित किया गया था।आज यह बिल राज्यसभा से भी पारित हो गए। अब राष्ट्रपति के दस्तखत के बाद यह कानून बन जाएंगे।सरकार का दावा है कि यह बिल श्रम क्षेत्र में बड़े सुधार लाएंगे।हालांकि कई श्रमिक संगठन और कांग्रेस पार्टी इनका विरोध भी कर रही है।

नए श्रम कानून से देश के संगठित व असंगठित दोनों ही प्रकार के श्रमिकों को कई प्रकार की नई सुविधाएं मिलेंगी।सभी श्रमिकों को नियुक्ति पत्र देना अनिवार्य होगा, उनके वेतन का डिजिटल भुगतान करना होगा।
साल में एक बार सभी श्रमिकों का हेल्थ चेकअप भी अनिवार्य किया गया है।वहीं, उद्यमियों के कारोबार को आसान बनाने के लिए कई प्रावधान लाए गए हैं।

श्रम मंत्री संतोष गंगवार ने तीनों श्रम सुधार विधेयकों पर हुई बहस का जवाब देते हुए कहा, ‘‘श्रम सुधारों का मकसद बदले हुए कारोबारी माहौल के अनुकूल पारदर्शी प्रणाली तैयार करना है।”
साथ ही उन्होंने यह भी बताया कि,”16 राज्यों ने पहले ही अधिकतम 300 कर्मचारियों वाली कंपनियों को सरकार की अनुमति के बिना फर्म को बंद करने और छंटनी करने की इजाजत दे दी है।गंगवार ने कहा कि रोजगार सृजन के लिए यह उचित नहीं है कि इस सीमा को 100 कर्मचारियों तक बनाए रखा जाए, क्योंकि इससे नियोक्ता अधिक कर्मचारियों की भर्ती से कतराने लगते हैं और वे जानबूझकर अपने कर्मचारियों की संख्या को कम स्तर पर बनाए रखते हैं।”

गंगवार ने कहा कि 73 साल के इतिहास में पहली बार इस प्रकार से श्रम कानून में बदलाव किए जा रहे हैं, जो नियोक्ता और श्रमिक दोनों के लिए फायदेमंद साबित होंगे।मजदूरी संहिता पहले ही अधिसूचित हो चुकी है।
इन चार संहिताओं में पुराने 29 कानून को एकीकृत किया गया है।

राज्यसभा में बुधवार को पारित हुए विधेयक संहिताएं- ‘उपजीविकाजन्य सुरक्षा, स्वास्थ्य तथा कार्यदशा संहिता 2020′, ‘औद्योगिक संबंध संहिता 2020′ और ‘सामाजिक सुरक्षा संहिता 2020′ हैं।इनमें किसी प्रतिष्ठान में आजीविका सुरक्षा, स्वास्थ्य एवं कार्यदशा को विनियमित करने, औद्योगिक विवादों की जांच एवं निर्धारण तथा कर्मचारियों की सामाजिक सुरक्षा संबंधी प्रावधान किए गए हैं।

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