रोजाना 5 नदियों को पार करके बच्चों को पढ़ाने जाती है ये महिला

0

आज हम आपको एक ऐसी महिला के बारे में बताने जा रहे हैं जो कि रोजाना करीब पांच नदियों को पार करके बच्चों को पढाने जाती हैं । जी हां, आज हम बात कर रहे हैं, फिलीपींस की रहने वाली Elizabeth Miranda के बारे में, जो रोज 2 Km चलकर और 5 नदियों को पार करके स्कूल में बच्चों को पढ़ाने जाती हैं । Elizabeth का कहना है कि जब बारिश होती है तब उन्हें बहुत ज्यादा दिक्कत होती है । क्योंकि ऐसे नदियों को पार करना बहुत मु्श्किल हो जाता है । इसके आगे Elizabeth ने बताया कि वहां तक पहुंचने में रोज उन्हें 3 घंटे लगते हैं । उन्होंने बताया कि कुछ नदियों को तो मैं आराम से पार कर लेती हूं मगर रास्ते में एक ऐसी नदी भी है जो लोगों के मदद के बिना पार करना मुश्किल हो जाता है ।

इसके आगे एलिजाबेथ ने बताया है कि, उन बच्चों के घर में खाने के पैसे भी नहीं हैं फिर वो मजे से पढ़ते हैं और खुश रहते हैं ।

 

SHARE
Previous articleमहापर्व दिवाली: जानिए धनतेरस से भाई दूज तक के पर्व की तिथि और शुभ मुहूर्त
Next articleसोशल मीडिया दुरुपयोग पर नियम बनाने के लिए केंद्र ने तीन महीने का और समय मांगा
बहुत ही मुश्किल है अपने बारे में लिखना । इसलिए ज्यादा कुछ नहीं, मैं बहुत ही सरल व्यतित्व का व्यक्ति हूं । खुशमिजाज हूं ए इसलिए चेहरे पर हमेशा खुशी रहती हैए और मुझे अकेला रहना ज्यादा पंसद है। मेरा स्वभाव है कि मेरी बजह से किसी का कोई नुकसान नहीं होना चाहिए और ना ही किसी का दिल दुखना चाहिए। चाहे वो व्यक्ति अच्छा हो या बुरा। मेरे इस स्वभाव के कारण कभी कभी मुझे खामियाजा भी भुगतान पड़ता है। मैं अक्सर उनके बारे में सोचकर भुला देता हूं क्योंकि खुश रहने का हुनर सिर्फ मेरे पास है। मेरी अपनी विचारए विचारधारा है जिसे में अभिव्यक्त करता रहता हूं । जिन लोगों के विचारों से कभी प्रभावित भी होता हूं तो उन्हें फोलो कर लेता हूं । अभी सफर की शुरुआत है मैने कंप्यूटर ऑफ माटर्स की डिग्री हासिल की है और इस मीडीया क्षेत्र में अभी नया हूं। मगर मुझे अब इस क्षेत्र में काम करना अच्छा लग रहा है। और फिर इसी में काम करने का मन बना लेना दूसरों के लिये अश्चर्य पूर्ण होगा। लेकिन इससे पहले और आज भी ब्लागर ने एक मंच दिया चिठ्ठा के रुप में, जहां बिना रोक टोक के आसानी से सबकुछ लिखा या बताया जा सका। कभी कभी मन में उठ रही बातों या भावों को शब्दों में पिरोयाए उनमें खुद की और दूसरों की कहानी कही। कभी उनके द्वारा किसी को पुकाराए तो कभी खुद ही रूठ गया। कई बार लिखने पर भी मन सतुष्ट नहीं हुआ और निरंतर कुछ नया लिखने मन बनता रहता है। अजीब सी बेचैनी जो न जाने क्या करवाएगी और कितना कुछ कर गुजर जाने की तमन्ना लिए निकले हैं इन सफरों, जहां उम्मीद और विश्वास दोनों कायम हैं जो अर्जुन के भांति लक्ष्य को भेद देंगे । मुझे अभी अपने जीवन में बहुत कुछ करना है किसी के सपनों को पूरा करना हैं । अब तो बस मेरा एक ही लक्ष्य हैं कि मैं बस उसके सपने पूरें करू।

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here