इस साल दो बार पड़ेगा यह महीना, जानिए कारण

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आपको बता दें कि साल 2020 यानी जो साल चल रहा हैं इसमें आश्विन मास पुरुषोत्तम मास होने जा रहा हैं ज्योतिष के मुताबिक भारतीय पंचांग के मुताबिक सम्वत 2077 में अश्विन मास अधिमास या पुरुषोत्तम मास के रूप में मनाया जाएगा। भारतीय काल गणना और ग्रहों की सूक्ष्म गति पर आधारित भारतीय पंचांग में दो प्रकार के वर्ष प्रचलित हैं एक है सौर वर्ष और दूसरा चंद्र वर्ष। सौर वर्ष 365.25 दिन का होता हैं वही जबकि चद्रमास 354 दिन का हैं दोनों प्रकार के वर्षों में 10—11 दिन का अंतर होता हैं वही वशिष्ठ सिद्धांत के मुताबिक इस अंतर का समयोजन करने के लिए 32 महीने 16 दिन आठ घंटे के बाद अधिक मास को बढ़ा देते हैं इस महीने को पुरुषोत्तम मास कहते हैं तो आज हम आपको इस महीने से जुड़ी जानकारी प्रदान करने जा रहे हैं तो आइए जानते हैं।

इसको बताने के पीछे भी एक पौराणिक कथा हैं जब 12 मास और उनके स्वामी देवता का निर्धारण हो गया और 13वें या अधिक मास का स्वामी बनने को कोई भी देव तैयार नहीं हुए तो स्वयं जगत के पालनहार श्री विष्णु इस मास के अधिपति देवता बनें। इसलिए इस मास को पुरुषोत्तम मास कहा जाता हैं मगर इस पूरे मास में विवाह, शुभ मुहूर्त, गृह प्रवेश, गृहारंभ आदि शुभ काम नहीं किए जाते हैं। मगर इस पूरे महीने में ईश्वर भजन, संकीर्तन और पूजा पाठ और दान किया जा सकता हैं इस साल आश्विन मास अधिक मास हैं यानी इस बार आश्विन मास दो बार आएगा। अधिक मास में प्रथम और चौथा पक्ष शुद्ध होता हैं बीच के दोनों पक्ष अशुभ माने जाते हैं अगर अधिमास नहीं होता हैं तो आश्विन मास केवल एक बार ही आता हैं जबकि इस साल यह दो बार पड़ रहा हैं।

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