2020 में Akshay Oberoi के लिए खासी उत्साहजनक रही ये चीज

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अभिनेता अक्षय ओबेरॉय पिछले कुछ दिनों में व्यस्त रहे, क्योंकि उनकी एक फिल्म का वर्चुअल प्रीमियर फिल्म फेस्टिवल में हुआ है। इस उपलब्धि को लेकर वो खासे खुश हैं।

फिल्म ‘छोटे नवाब’ का प्रीमियर पिछले हफ्ते सिनसिनाटी में भारतीय फिल्म समारोह में हुआ है। अक्षय ने कहा, “फिल्म समारोह वर्चुअली हुआ और लोग अपने घर में आराम से बैठकर इसे देख पाए। 2020 की यह सबसे उत्साहजनक चीज थी।”

कुमुद चौधरी द्वारा निर्देशित फिल्म ‘छोटे नवाब’ जुनैद नाम के 13 साल के बच्चे पर आधारित है, जो एक शादी अटेंड करने के लिए लखनऊ में अपनी पैतृक नवाबी हवेली में आता है।

अपनी भूमिका को लेकर अक्षय ने कहा, “मैं एक नवाब की भूमिका में हूं, जिसे शहर में बहुत सम्मान की नजर से देखा जाता है। लखनऊ में रहने के दौरान जुनैद मेरे जरिए दुनिया देखता है। मैं उसे समझाता हूं कि वह जो देखता है वो पूरी तस्वीर नहीं है।” इस फिल्म में प्लाबिता बोरठाकुर, सादिया सिद्दीकी और राजश्री देशपांडे भी हैं।

न्यूज स्त्रोत आईएएनएस

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बहुत ही मुश्किल है अपने बारे में लिखना । इसलिए ज्यादा कुछ नहीं, मैं बहुत ही सरल व्यतित्व का व्यक्ति हूं । खुशमिजाज हूं ए इसलिए चेहरे पर हमेशा खुशी रहती हैए और मुझे अकेला रहना ज्यादा पंसद है। मेरा स्वभाव है कि मेरी बजह से किसी का कोई नुकसान नहीं होना चाहिए और ना ही किसी का दिल दुखना चाहिए। चाहे वो व्यक्ति अच्छा हो या बुरा। मेरे इस स्वभाव के कारण कभी कभी मुझे खामियाजा भी भुगतान पड़ता है। मैं अक्सर उनके बारे में सोचकर भुला देता हूं क्योंकि खुश रहने का हुनर सिर्फ मेरे पास है। मेरी अपनी विचारए विचारधारा है जिसे में अभिव्यक्त करता रहता हूं । जिन लोगों के विचारों से कभी प्रभावित भी होता हूं तो उन्हें फोलो कर लेता हूं । अभी सफर की शुरुआत है मैने कंप्यूटर ऑफ माटर्स की डिग्री हासिल की है और इस मीडीया क्षेत्र में अभी नया हूं। मगर मुझे अब इस क्षेत्र में काम करना अच्छा लग रहा है। और फिर इसी में काम करने का मन बना लेना दूसरों के लिये अश्चर्य पूर्ण होगा। लेकिन इससे पहले और आज भी ब्लागर ने एक मंच दिया चिठ्ठा के रुप में, जहां बिना रोक टोक के आसानी से सबकुछ लिखा या बताया जा सका। कभी कभी मन में उठ रही बातों या भावों को शब्दों में पिरोयाए उनमें खुद की और दूसरों की कहानी कही। कभी उनके द्वारा किसी को पुकाराए तो कभी खुद ही रूठ गया। कई बार लिखने पर भी मन सतुष्ट नहीं हुआ और निरंतर कुछ नया लिखने मन बनता रहता है। अजीब सी बेचैनी जो न जाने क्या करवाएगी और कितना कुछ कर गुजर जाने की तमन्ना लिए निकले हैं इन सफरों, जहां उम्मीद और विश्वास दोनों कायम हैं जो अर्जुन के भांति लक्ष्य को भेद देंगे । मुझे अभी अपने जीवन में बहुत कुछ करना है किसी के सपनों को पूरा करना हैं । अब तो बस मेरा एक ही लक्ष्य हैं कि मैं बस उसके सपने पूरें करू।

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