लोकसभा चुनाव 2019: तीन बार सांसद रहे भाजपा नेता ने शरद यादव के लिए छोड़ी सीट!

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जयपुर। लोकसभा की तारीखों का ऐलान चुनाव आयोग ने कर दिया है और और इसी के साथ सभी दल लोकसभा चुनाव की तैयारियों में जुट गए हैं वहीं जबलपुर संसदीय क्षेत्र ने समय-समय पर नया राजनीतिक माह दंड भी स्थापित किया है और ऐसे में आज हम आपको जबलपुर और भारतीय जनता पार्टी के नेता शरद यादव की बारे में कुछ बातें बताने वाले हैं आपको बता दें कि नहीं खोल के चुनाव में समाजवादी दलों में जन संघ के बीच हुए समझौते के तहत जबलपुर सीटें समाजवादी दलों के हिस्से में आई थी और विपक्ष के सबसे बड़े नेता दादा बाबूराव यादव समाजवादी पार्टी छोड़ दी थी.

वहीं इसके बाद बताया जाता है कि समाजवादी दालों में बात कुछ बनी नहीं और इसी बात से नाराज होकर अपनी अलग पार्टी बना ली गई जिसमें राज्य पर ने कांग्रेस की रचना कुमारी जी जी बाइक को 1982 के उपचुनावों में हराकर कांग्रेस का पैलेस में तोड़ दिया था.

इसके अलावा बताया जाता है कि जबलपुर को भारतीय जनता पार्टी का घर बनाने वाले दादा परांजपे का इस सीट को लेकर एक महत्वपूर्ण योगदान रहा है वह तीन बार जबलपुर से सांसद रह चुके थे.

इंदिरा गांधी के द्वारा फैलाए जा रहे देशभर में लोकतांत्रिक तरीकों के खिलाफ लड़ते हुए उन्होंने शरद यादव के लिए और समाजवादी पार्टी के नेताओं के लिए इस सीट को छोड़ दिया था और अपनी लड़ाई जारी रखी थी उन्होंने जनसंघ और समाजवादी पार्टी द्वारा हुए इस गठबंधन के लिए अपनी सीट को त्याग दिया था.

इसके अलावा मीडिया में आई खबरों के अनुसार पूर्व जिला अध्यक्ष डॉ विनोद मिश्रा ने अपनी स्मृतियों को करते हुए बताया कि जब दादा परांजपे अपना पहला चुनाव जीते थे तबीयत कॉलेज में ही पढ़ रहे थे इसके अलावा डॉक्टर मिश्रा के मुताबिक दादा जबलपुर की जनता के बीच खासे लोकप्रिय बने हुए थे यहां तक कि चुनाव प्रचार प्रसार के दौरान वह जनता के पीछे दौड़ते हुए जाते थे और जनता से बात करते हुए वोट मांगते थे.

 

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