ऐसी है दक्षिण की आयोध्या, जहां क्रूज का सफर होता यादगार

हैदराबाद से लगभग 320 किमी. दूर खम्मम जिले से करीब 115 किमी की दूरी पर गोदावरी के अंचल में ​सिमटे तेलंगाना के एक छोटे से शहर में स्थित हैं दक्षिण की अयोघ्या — भद्राचलम् ।

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जयपुर। हैदराबाद से लगभग 320 किमी. दूर खम्मम जिले से करीब 115 किमी की दूरी पर गोदावरी के अंचल में ​सिमटे तेलंगाना के एक छोटे से शहर में स्थित हैं दक्षिण की अयोघ्या — भद्राचलम् । यहां की सुकून और शांति आपके रोम रोम को आनन्दित कर ​देती है। दक्षिण की अयोध्या कहे जाने वाले भद्राचलम महज एक धार्मिक नगरी ही नहीं है बल्कि यहाँ रोमांच का भरपूर खजाना है।

भद्राचलम  में सीता-राम का एक भव्य मंदिर है, जिसका निर्माण 17वीं शताब्दी में करवाया गया था। इस मंदिर के बारे में मान्यता है की यहाँ  स्थित मूर्तिया स्वयं प्रकट हुई थीं। किवदंतियों के अनुसार  पोकल्ला दम्मक्का नाम की एक महिला को स्वयं भगवान श्रीराम ने स्वप्न में भद्रागिरि पहाडि़यों पर विग्रह के अस्तित्व के बारे में बताया था। जब उस जगह जाकर इस बात की  पड़ताल की गयी तो ये सत्य साबित हुई और बाद में  उस जगह की साफ-सफाई करके वहां राम, सीता और लक्ष्मण की मूर्तियां स्थापित कीं।  वर्तमान मंदिर का निर्माण भक्त रामदास द्वारा करवाया  गया है ।

भद्राचलम में करीब 32 किलो मीटर दूर स्थित पर्णशाला हिंदू धर्म का एक विशेष स्थल है । यहां पर छोटी-छोटी झोपड़ियां  हैं, जिनमें भगवान राम की रंग-बिरंगी मूर्तियां सजाई गई हैं। यह माना जाता है की भगवान श्री राम  वनवास दौरान यहाँ पर रहे थे और इसी जगह से रावण सीता को उठा कर लंका ले गया था।  यहां सीता, लक्ष्मण तथा रावण की भी मूर्तियां हैं इसके साथ यहाँ  सीता के चरण चिह्न, मारीच का स्वर्णमृग रूप और संन्यासी भेष में रावण का मोजैक भी मौजूद  हैं। इसी स्थल के पास एक धारा है, जिसे ‘सीतावागु’ कहते हैं मान्यता है की सीता यहाँ स्नान किया करती थीं।

भद्राचलम में  उत्तर भारत से आने वाले दर्शनाथियों  को भाषायी समस्या का कम सामना करना पड़ता है क्योकि , यहां की अधिकतर आबादी हिंदी समझती-बोलती है। इसलिए दक्षिण भारत के अन्य हिस्सों की तरह यहां भाषा की समस्या का सामना नहीं करना पड़ता।

भद्राचलम यात्रा का सबसे ज्यादा आकर्षित करने वाला हिस्सा है  भद्राचलम-राजामुंदरी की क्रूज यात्रा।  राजमुंदरी से भद्राचलम की ओर  बहती है गोदावरी नदी , जिस पर लगभग 100 किमी. की दूरी का एक क्रूज चलता है। यह क्रूज से आप गोदावरी नदी के किनारे-किनारे विभिन्न मंदिरों और पहाड़ियों को देख सकते है यह नज़ारा एक ख़्वाब जैसा होता है । यही कारण  है की यह क्रूज की सवारी आप को बार बार यहाँ खींच कर ले आएगी। अगर आपक यहाँ आने का मन बना रहे तो आप यहाँ नवंबर से फरवरी के बीच आ सकते हैं। बारिश के मौसम में क्रूज़ यात्रा को गोदावरी नदी में बढ़े जलस्तर के कारण राज्य सरकार बंद करा देती है।

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