ये कुर्सी है शापित, अब तक 63 लोगो की हो चुकी है मौत

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दोस्तों, आज भी इस दुनिया में कई ऐसे रहस्य है जिसके बारे में कोई नहीं जानता इतना ही नहीं आज भी ऐसे कई रहस्य है जो कि आज भी रहस्य बने हुए हैं । आज हम आपको एक कुर्सी के बारे में बताने जा रहे हैं जो कि एक रहस्य से कम नहीं है । जी हां, इंग्लैंड के थर्कस म्यूजियम में जमीन से 6 फुट ऊंचाई पर सामान्य सी दिखने वाली एक कुर्सी को सालों से दीवार पर टांगा गया हैं । बताया जा रहा है कि, इस कुर्सी पर जो भी बैठता है उकसी मौत हो जाती है ।

आपको बता दें कि, ये कुर्सी थॉमस बस्बी नाम के शख्स की फेवरेट थी । अक्सर वो इस कुर्सी पर बैठा करते थे । मगर 1702 में थॉमस ने अपने ससुर की इसी कुर्सी पर हत्या कर दी थी। ऐसा थॉमस ने इसलिए किया क्योंकि उसके ससुर इस चेयर पर बैठ गए थे, जो कि उनको पंसद नहीं आया ।

ऐसा कहा जाता है कि इस चेयर पर बैठने के बाद से अब तक 63 लोगों की मौत हो चुकी है, मगर आज तक इस कुर्सी का रहस्य एक रहस्य ही बना हुआ है ।

 


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बहुत ही मुश्किल है अपने बारे में लिखना । इसलिए ज्यादा कुछ नहीं, मैं बहुत ही सरल व्यतित्व का व्यक्ति हूं । खुशमिजाज हूं ए इसलिए चेहरे पर हमेशा खुशी रहती हैए और मुझे अकेला रहना ज्यादा पंसद है। मेरा स्वभाव है कि मेरी बजह से किसी का कोई नुकसान नहीं होना चाहिए और ना ही किसी का दिल दुखना चाहिए। चाहे वो व्यक्ति अच्छा हो या बुरा। मेरे इस स्वभाव के कारण कभी कभी मुझे खामियाजा भी भुगतान पड़ता है। मैं अक्सर उनके बारे में सोचकर भुला देता हूं क्योंकि खुश रहने का हुनर सिर्फ मेरे पास है। मेरी अपनी विचारए विचारधारा है जिसे में अभिव्यक्त करता रहता हूं । जिन लोगों के विचारों से कभी प्रभावित भी होता हूं तो उन्हें फोलो कर लेता हूं । अभी सफर की शुरुआत है मैने कंप्यूटर ऑफ माटर्स की डिग्री हासिल की है और इस मीडीया क्षेत्र में अभी नया हूं। मगर मुझे अब इस क्षेत्र में काम करना अच्छा लग रहा है। और फिर इसी में काम करने का मन बना लेना दूसरों के लिये अश्चर्य पूर्ण होगा। लेकिन इससे पहले और आज भी ब्लागर ने एक मंच दिया चिठ्ठा के रुप में, जहां बिना रोक टोक के आसानी से सबकुछ लिखा या बताया जा सका। कभी कभी मन में उठ रही बातों या भावों को शब्दों में पिरोयाए उनमें खुद की और दूसरों की कहानी कही। कभी उनके द्वारा किसी को पुकाराए तो कभी खुद ही रूठ गया। कई बार लिखने पर भी मन सतुष्ट नहीं हुआ और निरंतर कुछ नया लिखने मन बनता रहता है। अजीब सी बेचैनी जो न जाने क्या करवाएगी और कितना कुछ कर गुजर जाने की तमन्ना लिए निकले हैं इन सफरों, जहां उम्मीद और विश्वास दोनों कायम हैं जो अर्जुन के भांति लक्ष्य को भेद देंगे । मुझे अभी अपने जीवन में बहुत कुछ करना है किसी के सपनों को पूरा करना हैं । अब तो बस मेरा एक ही लक्ष्य हैं कि मैं बस उसके सपने पूरें करू।

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