हर साल बनाकर बारिश में तोड़ दिया जाता है यह पुल, जानिए क्या है सच्चाई

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दोस्तों, हम आपको एक ऐसी जगह के बारे मे बताएंगे जहां पर हर साल पुल बनाया जाता है और बारिश के मौसम में उसे वहां पर रहने वाले ही तोड देते हैं । आपको बता दें कि, कंबोडिया की मेकोंग नदी पर ये पुल हर साल बनाया जाता है और उसे बारिश के मौसम में तोड भी दिया जाता है । जानकारी के अनुसार, ये पुल कामपोंग चाम और कोह पेन को एक दूसरे से जोडता हैं । कंबोडिया का यह खास पुल बांस का बना है । इसमें 100, 500 या 1000 बांस नहीं पूरे 50000 बांस लगे हैं । इस पुल की लंबाई 3300 फुट है । हर साल मई से नवंबर की बीच बारिश के मौसम में इस पुल में लगे बांस को खोलकर रख लिए जाते हैं । अगले साल फिर गर्मियों के मौसम में इस बांसों का उपयोग करके एक नया पुल बनाया जाता है ।

गर्मियों में बांस का पुल बनाने और बारिश में हटाने की यह परंपरा कई दशक पुरानी है । सिर्फ कंबोडियाई सिविल वॉर के दौरान ही इसमें ब्रेक लगा था । इस पर सिर्फ पैदल यात्री ही नहीं चलते हैं, बल्कि साइकिल, मोटरबाइक, कार और ट्रक भी इस पर से गुजरते हैं । इस पुल को पार करने के लिए स्थानीय लोगों से 100 रिएल चुकाने पड़ते हैं । हालांकि, विदेशी पर्यटकों को कुछ ज्यादा कीमत चुकानी पडती हैं । यह कहना मुश्किल है कि बांस के पुल को बनाने और खोलने की यह परंपरा कब तक कायम रहेगी ।

 


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बहुत ही मुश्किल है अपने बारे में लिखना । इसलिए ज्यादा कुछ नहीं, मैं बहुत ही सरल व्यतित्व का व्यक्ति हूं । खुशमिजाज हूं ए इसलिए चेहरे पर हमेशा खुशी रहती हैए और मुझे अकेला रहना ज्यादा पंसद है। मेरा स्वभाव है कि मेरी बजह से किसी का कोई नुकसान नहीं होना चाहिए और ना ही किसी का दिल दुखना चाहिए। चाहे वो व्यक्ति अच्छा हो या बुरा। मेरे इस स्वभाव के कारण कभी कभी मुझे खामियाजा भी भुगतान पड़ता है। मैं अक्सर उनके बारे में सोचकर भुला देता हूं क्योंकि खुश रहने का हुनर सिर्फ मेरे पास है। मेरी अपनी विचारए विचारधारा है जिसे में अभिव्यक्त करता रहता हूं । जिन लोगों के विचारों से कभी प्रभावित भी होता हूं तो उन्हें फोलो कर लेता हूं । अभी सफर की शुरुआत है मैने कंप्यूटर ऑफ माटर्स की डिग्री हासिल की है और इस मीडीया क्षेत्र में अभी नया हूं। मगर मुझे अब इस क्षेत्र में काम करना अच्छा लग रहा है। और फिर इसी में काम करने का मन बना लेना दूसरों के लिये अश्चर्य पूर्ण होगा। लेकिन इससे पहले और आज भी ब्लागर ने एक मंच दिया चिठ्ठा के रुप में, जहां बिना रोक टोक के आसानी से सबकुछ लिखा या बताया जा सका। कभी कभी मन में उठ रही बातों या भावों को शब्दों में पिरोयाए उनमें खुद की और दूसरों की कहानी कही। कभी उनके द्वारा किसी को पुकाराए तो कभी खुद ही रूठ गया। कई बार लिखने पर भी मन सतुष्ट नहीं हुआ और निरंतर कुछ नया लिखने मन बनता रहता है। अजीब सी बेचैनी जो न जाने क्या करवाएगी और कितना कुछ कर गुजर जाने की तमन्ना लिए निकले हैं इन सफरों, जहां उम्मीद और विश्वास दोनों कायम हैं जो अर्जुन के भांति लक्ष्य को भेद देंगे । मुझे अभी अपने जीवन में बहुत कुछ करना है किसी के सपनों को पूरा करना हैं । अब तो बस मेरा एक ही लक्ष्य हैं कि मैं बस उसके सपने पूरें करू।

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