कोरोना काल में इस नाई ने दी अलग मिसाल, तस्वीरें वायरल !

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दोस्तों, जैसा कि हम सबको पता है कि आजकल कोरोनावायरस के कारण पूरे देश में लॉकडाउन किया गया है मगर हाल ही में, हमारे देश के पीएम ने कुछ दुकानों को खोलने के आदेश दे दिए हैं मगर अभी तक नाई की दुकान को खोलने के आदेश नहीं दिए हैं । आज हम आपको एक ऐसे नाई के बारे में बताएंगे जिसकी कुछ तस्वीरें आजकल सोशल मीडिया पर काफी वायरल हो रही हैं । बताया जा रहा है कि, ये तस्वीरें हरियाणा से हैं । जानकारी के मुताबिक, ये तस्वीर हरियाणा के पंचकूला की है। इसका कैप्शन वो लिखते हैं, ‘हरियाणा: दो भाइयों ने सड़क किनारे अपनी नाई की दुकान लॉकडाउन के बाद खोली है। उनमें से एक ने बताया-ये दुकान हम 20 वर्षों से चला रहे हैं ।

इन वायरल तस्वीरों में आप देख सकते हैं कि दोनों भाइयों की दुकान सड़क किनारे हैं ओर दोनों ने पीपीई किट पहनकर लोगों के बाल काट भी रहे हैं । हालांकि, इनकी पीपीई किट वाले मामले को लेकर लोगो के द्वारा इनकी सराहना की, पर एक सवाल भी उठाया कि वायरस तो भैया कस्टमर टू कस्टमर भी फैल सकता है ।

 

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बहुत ही मुश्किल है अपने बारे में लिखना । इसलिए ज्यादा कुछ नहीं, मैं बहुत ही सरल व्यतित्व का व्यक्ति हूं । खुशमिजाज हूं ए इसलिए चेहरे पर हमेशा खुशी रहती हैए और मुझे अकेला रहना ज्यादा पंसद है। मेरा स्वभाव है कि मेरी बजह से किसी का कोई नुकसान नहीं होना चाहिए और ना ही किसी का दिल दुखना चाहिए। चाहे वो व्यक्ति अच्छा हो या बुरा। मेरे इस स्वभाव के कारण कभी कभी मुझे खामियाजा भी भुगतान पड़ता है। मैं अक्सर उनके बारे में सोचकर भुला देता हूं क्योंकि खुश रहने का हुनर सिर्फ मेरे पास है। मेरी अपनी विचारए विचारधारा है जिसे में अभिव्यक्त करता रहता हूं । जिन लोगों के विचारों से कभी प्रभावित भी होता हूं तो उन्हें फोलो कर लेता हूं । अभी सफर की शुरुआत है मैने कंप्यूटर ऑफ माटर्स की डिग्री हासिल की है और इस मीडीया क्षेत्र में अभी नया हूं। मगर मुझे अब इस क्षेत्र में काम करना अच्छा लग रहा है। और फिर इसी में काम करने का मन बना लेना दूसरों के लिये अश्चर्य पूर्ण होगा। लेकिन इससे पहले और आज भी ब्लागर ने एक मंच दिया चिठ्ठा के रुप में, जहां बिना रोक टोक के आसानी से सबकुछ लिखा या बताया जा सका। कभी कभी मन में उठ रही बातों या भावों को शब्दों में पिरोयाए उनमें खुद की और दूसरों की कहानी कही। कभी उनके द्वारा किसी को पुकाराए तो कभी खुद ही रूठ गया। कई बार लिखने पर भी मन सतुष्ट नहीं हुआ और निरंतर कुछ नया लिखने मन बनता रहता है। अजीब सी बेचैनी जो न जाने क्या करवाएगी और कितना कुछ कर गुजर जाने की तमन्ना लिए निकले हैं इन सफरों, जहां उम्मीद और विश्वास दोनों कायम हैं जो अर्जुन के भांति लक्ष्य को भेद देंगे । मुझे अभी अपने जीवन में बहुत कुछ करना है किसी के सपनों को पूरा करना हैं । अब तो बस मेरा एक ही लक्ष्य हैं कि मैं बस उसके सपने पूरें करू।

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