अपनों के लिए इस 18 साल की लड़की ने बेची अपनी वर्जिनिटी

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कई बार हमारे सामने ऐसी परिस्थियां आ जाती है ​जब हमें ना चाहते हुए भी वो काम करना पडता है जिसको हम करना नहीं चाहते । कुछ ऐसा ही आज हम आपको बताने जा रहे हैं जहां पर एक लडकी को अपने परिवार के लिए अपनी वर्जिनिटी बेचनी पड गई । बताया जा रहा है कि, यूरोप की रहने वाली 18 साल की एलेक्सएंडरा कैफरीन ने अपने सपने और इच्छाओं को पूरा करने के लिए जो काम किया उसके बारे में जानकर आप हैरान हो जाएंगे ।

इस लड़की ने खुद को इसलिये सात करोड़ में बेच दिया क्योंकि वह अपने माता पिता को घर दिलाना चाहती थी । बताया गया है कि गरीब माता पिता ने अपनी बेटी से घर दिलाने की इच्छा जाहिर की थी, इसलिये उसने अपनी बोली आॅनलाइन लगा दी । इस लडकी का नाम एलेक्सएंडरा कैफरीन है ।

आपको बता दें कि, ये अपने माता पिता से बहुत प्यार करती है, वह उन्हें एक अच्छा घर तो दिलाना ही चाहती है वहीं उसकी इच्छा आॅक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी में भी पढ़ने की है मगर उसकी आर्थिक स्थिति सही नहीं है जिसके चलते उसने ऐसा कदम उठाया ।

 

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बहुत ही मुश्किल है अपने बारे में लिखना । इसलिए ज्यादा कुछ नहीं, मैं बहुत ही सरल व्यतित्व का व्यक्ति हूं । खुशमिजाज हूं ए इसलिए चेहरे पर हमेशा खुशी रहती हैए और मुझे अकेला रहना ज्यादा पंसद है। मेरा स्वभाव है कि मेरी बजह से किसी का कोई नुकसान नहीं होना चाहिए और ना ही किसी का दिल दुखना चाहिए। चाहे वो व्यक्ति अच्छा हो या बुरा। मेरे इस स्वभाव के कारण कभी कभी मुझे खामियाजा भी भुगतान पड़ता है। मैं अक्सर उनके बारे में सोचकर भुला देता हूं क्योंकि खुश रहने का हुनर सिर्फ मेरे पास है। मेरी अपनी विचारए विचारधारा है जिसे में अभिव्यक्त करता रहता हूं । जिन लोगों के विचारों से कभी प्रभावित भी होता हूं तो उन्हें फोलो कर लेता हूं । अभी सफर की शुरुआत है मैने कंप्यूटर ऑफ माटर्स की डिग्री हासिल की है और इस मीडीया क्षेत्र में अभी नया हूं। मगर मुझे अब इस क्षेत्र में काम करना अच्छा लग रहा है। और फिर इसी में काम करने का मन बना लेना दूसरों के लिये अश्चर्य पूर्ण होगा। लेकिन इससे पहले और आज भी ब्लागर ने एक मंच दिया चिठ्ठा के रुप में, जहां बिना रोक टोक के आसानी से सबकुछ लिखा या बताया जा सका। कभी कभी मन में उठ रही बातों या भावों को शब्दों में पिरोयाए उनमें खुद की और दूसरों की कहानी कही। कभी उनके द्वारा किसी को पुकाराए तो कभी खुद ही रूठ गया। कई बार लिखने पर भी मन सतुष्ट नहीं हुआ और निरंतर कुछ नया लिखने मन बनता रहता है। अजीब सी बेचैनी जो न जाने क्या करवाएगी और कितना कुछ कर गुजर जाने की तमन्ना लिए निकले हैं इन सफरों, जहां उम्मीद और विश्वास दोनों कायम हैं जो अर्जुन के भांति लक्ष्य को भेद देंगे । मुझे अभी अपने जीवन में बहुत कुछ करना है किसी के सपनों को पूरा करना हैं । अब तो बस मेरा एक ही लक्ष्य हैं कि मैं बस उसके सपने पूरें करू।

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