दयालुता के बारे में सोचने पर आता है बहन का ख्याल : जूलिया रॉबर्ट्स

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हॉलीवुड स्टार जूलिया रॉबर्ट्स का कहना है कि उन्हें इस बात पर हमेशा से भरोसा रहा है कि दयालुता के कई रूप होते हैं और दयालुता के बारे में सोचने पर उन्हें अपनी बहन लिसा गिलन का ख्याल आता है। जूलिया ने बड़ा दिल रखने के लिए अपनी बहन का शुक्रिया अदा किया।

पीपल डॉट कॉम को जूलिया ने बताया, “हमेशा से मेरा यही मानना है कि दयालुता के कई रूप होते हैं। इनमें से कुछ बिल्कुल प्रत्यक्ष, तो कुछ अप्रत्यक्ष होते हैं। कुछ का एक आकार होता है, तो कुछ दयालुता, जैसा कि मैंने देखा है एक आलिंगन की तरह होता है, जो आपको चारों ओर से घेरे रहता है।”

स्टार ने आगे कहा, “मैं जब भी दयालुता के बारे में सोचती हूं, मुझे मेरी बहन लीजा का ख्याल आता है, खासकर उस कार्य के लिए जो उसने हमारे किरोशावस्था के दौरान किया था।”

अपने किशोरावस्था की घटना को याद करते हुए अभिनेत्री ने कहा, “17 साल की उम्र में जब मैंने हाई स्कूल की डिग्री हासिल की थी, तो वह पहले ही न्यूयॉर्क शहर जा चुकी थी और उसने थिएटर स्कूल में दाखिला ले लिया था। तब वह 19 साल की थी और निश्चित रूप से उसके मन में भी बहुत सारी चीजें रही होंगी, लेकिन जब मैंने हाई स्कूल की डिग्री हासिल करने के कुछ ही दिन के बाद उसके साथ जाने के लिए कहा (क्योंकि मुझे उसकी याद आती थी), तो उसने बिना पलक झपकाए और बिना विचार किए मुझे हां कह दिया था।”

स्टार ने आगे कहा, “उस वक्त मुझे उसकी दयालुता का अहसास नहीं था, लेकिन वक्त के साथ मुझे सारी बातें समझ आईं।”

न्यूज स्त्रोत आईएएनएस


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बहुत ही मुश्किल है अपने बारे में लिखना । इसलिए ज्यादा कुछ नहीं, मैं बहुत ही सरल व्यतित्व का व्यक्ति हूं । खुशमिजाज हूं ए इसलिए चेहरे पर हमेशा खुशी रहती हैए और मुझे अकेला रहना ज्यादा पंसद है। मेरा स्वभाव है कि मेरी बजह से किसी का कोई नुकसान नहीं होना चाहिए और ना ही किसी का दिल दुखना चाहिए। चाहे वो व्यक्ति अच्छा हो या बुरा। मेरे इस स्वभाव के कारण कभी कभी मुझे खामियाजा भी भुगतान पड़ता है। मैं अक्सर उनके बारे में सोचकर भुला देता हूं क्योंकि खुश रहने का हुनर सिर्फ मेरे पास है। मेरी अपनी विचारए विचारधारा है जिसे में अभिव्यक्त करता रहता हूं । जिन लोगों के विचारों से कभी प्रभावित भी होता हूं तो उन्हें फोलो कर लेता हूं । अभी सफर की शुरुआत है मैने कंप्यूटर ऑफ माटर्स की डिग्री हासिल की है और इस मीडीया क्षेत्र में अभी नया हूं। मगर मुझे अब इस क्षेत्र में काम करना अच्छा लग रहा है। और फिर इसी में काम करने का मन बना लेना दूसरों के लिये अश्चर्य पूर्ण होगा। लेकिन इससे पहले और आज भी ब्लागर ने एक मंच दिया चिठ्ठा के रुप में, जहां बिना रोक टोक के आसानी से सबकुछ लिखा या बताया जा सका। कभी कभी मन में उठ रही बातों या भावों को शब्दों में पिरोयाए उनमें खुद की और दूसरों की कहानी कही। कभी उनके द्वारा किसी को पुकाराए तो कभी खुद ही रूठ गया। कई बार लिखने पर भी मन सतुष्ट नहीं हुआ और निरंतर कुछ नया लिखने मन बनता रहता है। अजीब सी बेचैनी जो न जाने क्या करवाएगी और कितना कुछ कर गुजर जाने की तमन्ना लिए निकले हैं इन सफरों, जहां उम्मीद और विश्वास दोनों कायम हैं जो अर्जुन के भांति लक्ष्य को भेद देंगे । मुझे अभी अपने जीवन में बहुत कुछ करना है किसी के सपनों को पूरा करना हैं । अब तो बस मेरा एक ही लक्ष्य हैं कि मैं बस उसके सपने पूरें करू।

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