ये हैं वो किस्से जो पूरी तरह साबित करे देंते हैं कि धोनी स्वार्थी नहीं है

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जयपुर (स्पोर्ट्स डेस्क) महेंद्र सिंह धोनी की गिनती दुनिया के सबसे सफलत्म कप्तानों में होती है। धोनी जितने खिलाडी़ या कप्तान के रुप में अच्छे रहे हैं वह उतने ही एक व्यक्ति के रुप में भी अच्छे हैं । हम यहां धोनी से जुड़े कुछ ऐसे किस्से बताने जा रहे हैं जिनके जरिए यह साबित होता है कि धोनी बिल्कुल भी स्वार्थी नहीं है । साल 2008 की बात जब सौरभ गांगुली अपना अंतिम मैच खेल रहे थे तब अंतिम सीजन के दौरान धोनी ने सौरभ से कहा कि वो ही मैच की ऑन फील्ड कप्तानी करे।

गांगुली की बात मानकर कई ओवर तक कप्तानी संभाली। धोनी इस समय टेस्ट क्रिकेट नए कप्तान बने थे धोनी अपने सीनियर को जिस तरह से इज्जत दी, वह काबिले तारीफ है ।बता दें की जब भी भारत को सीरीज जीतते है तो धोनी अक्सर टॉफी के साथ नए खिलाड़ियों को पीछे खड़े हो जाते हैं एक तरह से धोनी लाइम लाइट से दूरी बनाकर रखते हैं । क्योंकि वह चाहते हैं कि नए खिलाड़ियों को एक्सपोजर मिले ।

वैसे गौर किया जाए तो टीम इंडिया की कप्तानी छोड़ने के बाद भी धोनी ने अपनी टीम के बारे सोचना अभी छोड़ा नहीं जो खिलाड़ी तीनों प्रारुप में अच्छा प्रदर्शन करते हैं तो उन्हें हाई सैलरी कैटगरी में रखा जाता है ।पर धोनी का टेस्ट से सन्यास लेने के बाद उन्हें कम सैलरी मिलती है।

2016 में ज़िम्बाब्वे टीम के खिलाफ बैटिंग करते समय जब धोनी आउट हुए तब उनकी आँखों में चोट लग गयी थी। उस दौरान धोनी को साफ़ दिखाई नहीं दे रहा था और उनसे मैच छोड़ने के लिए कहा गया था उस दौरान लेकिन धोनी ने फिर भी उस मैच में विकेट कीपिंग की और भारत को जीत दिलाई।

एक वाक्या यह भी है कि धोनी जब विश्व कप खेल रहे थे तो उसी दौरान उनकी बेटी का जन्म हुआ। जब धोनी से पूचा गया कि वो अपनी बेटी से मिलने क्यों नहीं गए तो उन्होंने बताया कि टीम उनके सबसे ज्यादा जरूर है ।

 

दोस्तों  आपको क्या लगता है कि महेंद्र सिंह  धोनी स्वार्थी है कमेंट बॉक्स में राय दें ।

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