सिस्टम में कैश की कमी बनी रहेगी, जानिए आप पर कैसे पड़ेगा असर

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जयपुर। भारत की व्यवस्था को देखते हुए भारतीय रिजर्व बैंक ने बताया है कि इस साल रेपो रेट में 8% की कटौती कराई जा सकती है और ऊपरी गई है. इसके बाद आपको बता दें आपकी होम लोन और ऑटो लोगों की दरों में इसके मुकाबले बहुत कमी हुई है वहीं रेपो रेट वह दर है जिस पर बैंक आरबीआई से कम समय के लिए उधार लेता है और अगर रेपो रेट में कटौती से बैंकों को सस्ता कर्ज मिल रहा है फिर हम आपको होम लोन और ऑटो लोन की दरों में कटौती क्यों नहीं हुई है?

वही आपको बता दें कि रेपो रेट में कटौती से बैंकों का सस्ता कर्ज मिल रहा है फिर आपको होम लोन और ऑटो लोन की दरों में उतनी कटौती नहीं मिल रही होगी अब बैंकों का कहना है कि सिस्टम में कम लिक्विडिटी यानी कम किया और ऊंची जमा दरों की वजह से उनके हाथ बंधे हुए हैं और इसी वजह से आरबीआई के कर्ज सस्ता करने का पूरा फायदा भी ग्राहकों को नहीं दे पा रहे हैं.

लिक्विडिटी के कम होने का मतलब आपको बता दें कि बैंकिंग सिस्टम में बैंकों के पास अवेलेबल साइट्स और रिजर्व है इसलिए जब बैंक कहते हैं कि उनके पास पर्याप्त लिक्विडिटी नहीं है तो उसका अर्थ यह है कि उनके पास जितना फंड है या आ रहा है उससे अधिक तेजी से कर्ज की मांग बढ़ रही है.

वही आपको बता दे की ऊंची जमा धरोहर सिस्टम में कैश की कमी के चलते उनके लिए फंड की लागत ऊंची बनी हुई है वैसे ही कोई नई बात नहीं है और आज भी लंबे समय से इस समस्या से परेशान हो रहा है वही आपको बता दें कि वह लगातार यह बात कह रहा है कि उसकी कर्ज सस्ता करने के बावजूद बैंक उसका पूरा लाभ ग्राहकों को नहीं दे रहे हैं.

 

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