राजस्थान में भी है एक ऐसा महल, जहाँ आज भी है भूतों का बसेरा

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जयपुर। भूतों को लेकर आज भी बहुत कंफ्यूजन रहता है। विज्ञान के अनुसार भूत जैसी कोई चीज नहीं होती है तो वहीं लोगों की तमाम ऐसी कहानियां सुनने को मिल जाएंगी जो आपको भूतों पर यकीन करने पर मजबूर कर देती हैं। हम भी इस पर ज्यादा विमर्श की बातें नहीं करते हैं, आपने दुनिया भर के लोगों से कई तरह की बातें सुनी होंगी और कई किलों के बारे में भी सुना होगा कि किलों में भूतों का बसेरा है, तो ऐसे ही एक किले के बारे में आज हम बताने जा रहे हैं जो कि राजस्थान के अलवर जिले में स्थित है…

राजस्थान की राजधानी जयपुर के ही करीब अलवर जिले किला बहुत प्रसिद्ध है जो ‘भूतहा किला’ माना जाता है।  और जिसे भानगढ़ के किले के नाम से जाना जाता है। जानकारी के लिये बता दें कि इस किले को आमेर के राजा भगवंत दास ने 1573 में बनवाया था। भगवंत दास के छोटे बेटे और मुगल शहंशाह अकबर के नवरत्नों में शामिल मानसिंह के भाई माधो सिंह ने बाद में इसे अपनी रिहाइश बना लिया।

जानकारी के लिये बता दें कि भानगढ़ की राजकुमारी रत्‍नावती अपूर्व सुन्‍दरी थी जि‍सके स्‍वयंवर की तैयारी चल रही थी। उसी राज्‍य में एक तांत्रिक सिंघि‍या नाम का था जो राजकुमारी को पाना चाहता था परन्‍तु यह सम्भव नहीं था। इसलि‍ए तांत्रिक सिंघि‍या ने राजकुमारी की दासी जो राजकुमारी के श्रृंगार के लि‍ए तेल लाने बाजार आयी थी उस तेल को जादू से सम्‍मोहि‍त करने वाला बना दि‍या।

राजकुमारी रत्‍नावती के हाथ से वह तेल एक चट्टान पर गि‍रा तो वह चट्टान तांत्रिक सिंघि‍या की तरफ लुढ़कती हुई आने लगी और उसके ऊपर गि‍रकर उसे मार दि‍या। तांत्रिक सिंघि‍या मरते समय उस नगरी व राजकुमारी को नाश होने का श्राप दे दि‍या जि‍ससे यह नगर ध्‍वस्‍त हो गया। जो कि अब खंडहर में तब्दील हो चुका है। इस किले में आज भी रात में जाने की मनाही है।

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