DU के कुछ कॉलेजों में छात्राओं के लिए अभी भी हैं एडमिशन के मौके

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दिल्ली विश्वविद्यालय से संबद्ध नॉन कॉलेजिएट वीमेंस एजुकेशन बोर्ड ( एनसीवेब ) के 26 सेंटर विभिन्न कॉलेजों में चल रहे हैं। इन सभी के एडमिशन कॉलेज स्तर पर हो रहे हैं। इस साल ईडब्ल्यूएस आरक्षण के कारण सीटों में इजाफा हुआ है। कई सेंटर्स का कहना है कि अभी भी उनके यहां सीट खाली हैं। हालांकि एनसीवेब ने अंडरग्रेजुएट कोर्सो में पांचवीं लिस्ट के बाद छठी लिस्ट आएगी भी या नहीं, अभी कुछ तय नहीं है। इन कॉलेजों, सेंटरों पर सामान्य वर्गो की छात्राओं की सीटें कुछ कॉलेजों में बंद हो गई हैं, लेकिन कुछ कॉलेजों में अभी भी सामान्य वर्गो की छात्राओं की सीटें खाली हैं। इन कॉलेजों में एससी, एसटी ,ओबीसी व ईडब्ल्यूएस छात्राओं की कई सीटें अभी भी खाली पड़ी हुई हैं।

अरबिंदो कॉलेज के सेंटर प्रभारी प्रोफेसर हंसराज ने एनसीवेब की निदेशक डॉक्टर गीता भट्ट व उप निदेशक डॉ. उमाशंकर से मांग की है कि एनसीवेब की छात्राओं के लिए स्पेशल ड्राइव चलाने से पूर्व वह कॉलेजों से एडमिशन संबंधी आंकड़े मंगवाए। पता किया जाए कि पांचवीं लिस्ट तक कितने एडमिशन हुए हैं और कितनी सीटें खाली पड़ी हुई हैं। उसके बाद ही स्पेशल ड्राइव चलाया जाए।

प्रोफेसर हंसराज ने कहा, “अभी भी कुछ कॉलेजों में सामान्य वर्गो की सीटें खाली हैं, क्योंकि कॉलेजों ने इन सीटों को भरने के लिए मार्क्‍स की छूट कम दी थी, जिससे उस परसेंटेज में छात्राएं नहीं आ पाईं। एनसीवेब में पांचवी कट ऑफ के बाद भी खाली सीटें रह गई हैं। इन खाली पड़ी सीटों में सबसे ज्यादा एससी, एसटी, ओबीसी और ईडब्ल्यूएस छात्राओं की हैं।”

दिल्ली की वे छात्राएं जिन्हें रेगुलर कॉलेजों में एडमिशन नहीं मिला, उन छात्राओं को यह उम्मीद थी कि उनका एडमिशन रेगुलर में नहीं तो एनसीवेब में हो जायेगा, लेकिन यहां भी कुछ कॉलेजों में हाई कट ऑफ के चलते कहीं एडमिशन नहीं हो पाया। छात्राओं को अभी भी उम्मीद की एक किरण दिखाई दे रही है जिन्होंने कहीं भी एडमिशन नहीं लिया है, यदि स्पेशल ड्राइव व पर्सेटेज कम होता है तो उन्हें एनसीवेब में दिल्ली की छात्राओं को मौका मिल सकता है।

एनसीवेब में प्रति वर्ष करीब 12 हजार छात्राएं एडमिशन लेती थीं। लेकिन जब से ईडब्ल्यूएस कोटा बढ़ा है एनसीवेब में भी सीटें बढ़ी हैं। पहले प्रत्येक सेंटर पर 426 छात्राओं के लिए बीए व बीकॉम प्रोग्राम में सीटें थीं जो बढ़कर इस साल 586 हो गई हैं। इन सीटों के बढ़ने से एससी, एसटी, ओबीसी व ईडब्ल्यूएस सीटों में भी इजाफा हुआ है। इस तरह से 12 हजार सीटों से बढ़कर अब 15 ,236 सीटें हो गई है। इन सीटों को भरने के लिए बोर्ड ने पांच कट ऑफ जारी की जिसमें अभी भी बहुत से सेंटर पर आरक्षित श्रेणी की सीटें खाली पड़ी हुई हैं।

न्यूज स्त्रोत आईएएनएस

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बहुत ही मुश्किल है अपने बारे में लिखना । इसलिए ज्यादा कुछ नहीं, मैं बहुत ही सरल व्यतित्व का व्यक्ति हूं । खुशमिजाज हूं ए इसलिए चेहरे पर हमेशा खुशी रहती हैए और मुझे अकेला रहना ज्यादा पंसद है। मेरा स्वभाव है कि मेरी बजह से किसी का कोई नुकसान नहीं होना चाहिए और ना ही किसी का दिल दुखना चाहिए। चाहे वो व्यक्ति अच्छा हो या बुरा। मेरे इस स्वभाव के कारण कभी कभी मुझे खामियाजा भी भुगतान पड़ता है। मैं अक्सर उनके बारे में सोचकर भुला देता हूं क्योंकि खुश रहने का हुनर सिर्फ मेरे पास है। मेरी अपनी विचारए विचारधारा है जिसे में अभिव्यक्त करता रहता हूं । जिन लोगों के विचारों से कभी प्रभावित भी होता हूं तो उन्हें फोलो कर लेता हूं । अभी सफर की शुरुआत है मैने कंप्यूटर ऑफ माटर्स की डिग्री हासिल की है और इस मीडीया क्षेत्र में अभी नया हूं। मगर मुझे अब इस क्षेत्र में काम करना अच्छा लग रहा है। और फिर इसी में काम करने का मन बना लेना दूसरों के लिये अश्चर्य पूर्ण होगा। लेकिन इससे पहले और आज भी ब्लागर ने एक मंच दिया चिठ्ठा के रुप में, जहां बिना रोक टोक के आसानी से सबकुछ लिखा या बताया जा सका। कभी कभी मन में उठ रही बातों या भावों को शब्दों में पिरोयाए उनमें खुद की और दूसरों की कहानी कही। कभी उनके द्वारा किसी को पुकाराए तो कभी खुद ही रूठ गया। कई बार लिखने पर भी मन सतुष्ट नहीं हुआ और निरंतर कुछ नया लिखने मन बनता रहता है। अजीब सी बेचैनी जो न जाने क्या करवाएगी और कितना कुछ कर गुजर जाने की तमन्ना लिए निकले हैं इन सफरों, जहां उम्मीद और विश्वास दोनों कायम हैं जो अर्जुन के भांति लक्ष्य को भेद देंगे । मुझे अभी अपने जीवन में बहुत कुछ करना है किसी के सपनों को पूरा करना हैं । अब तो बस मेरा एक ही लक्ष्य हैं कि मैं बस उसके सपने पूरें करू।

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