चांद पर नमी के तत्व और यौगिग है लेकिन कुछ हिस्सों में चांद है सूखा

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जयपुर। वैज्ञानिक हमें इंसान को चांद पर ले जाकर बस्ति बसाना चाहता है। लोगों को अंतरिक्ष की सैर करना चाह रहा है। लेकिन हालही में हुय एक शोध से ज्ञात हुआ है कि चाँद का एक हिस्सा बहुत ही ज्यादा सूखा है जिसमें पानी का कोई नामों निशान नहीं है। जानकारी के लिए बता दे कि वर्ष 1972 में अपोलो 16 मिशन के दौरान चंद्रमा की सतह से इकट्ठी की गई एक पुरानी चट्टान का वैज्ञानिकों ने विश्लेषण किया और बताया कि चाँद के इस अंदरूनी हिस्से में  बहुत सूखा प्रतीत होता है।

साथ ही उन्होंने कहा कि चंद्रमा पर नमी का सवाल इसलिए जरूरी  है क्योंकि पानी और अन्य वाष्पशील तत्वों और यौगिकों की मात्रा चंद्रमा के इतिहास के बार में जानकारी देती है। और साथ ही इसके बनने के बारे में भी संकेत देती है। अमेरिका में स्थित यूनिवसर्टिी ऑफ कैलिफॉर्निया के प्रोफेसतर सैन डिएगो के जेम्स डे ने इस विषय पर कहा  कि यह एक बड़ा सवाल रहा है कि चंद्रमा नमीयुक्त है या सूखा है। शोधकर्ता इंसानों को अंतरिक्ष में ले  जा रहे और अभी तक ये समझ में नहीं आ रहा है कि चाँद पर नमी है या सूखा।

यह हमें  मामूली सी बात लग सकती है लेकिन असल में यह बहुत बड़ी बात है। वैज्ञानिकों की जानकारी के अनुसार जब चंद्रमा बना, तब वह बहुत अधिक गर्म था।  वह इतना अधिक गर्म रहा होगा कि जल या चंद्रमा की स्थितियों के तहत कोई अन्य वाष्पशील तत्व या यौगिक बहुत पहले ही वाष्पित हो चुके होंगे। और इसके बारे में अभी तक खोज चल रही है। 2030 तक इंसानों का अंतरिक्ष में जाना संभव नहीं हो सकता है।

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