भोपाल रेल प्रदर्शनी में दिखी विकास यात्रा, जानिए इसके बारे में !

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मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में रविवार से शुरू हुई तीन दिवसीय रेल प्रदर्शनी भारतीय रेलवे की विकास यात्रा की गवाही दे रही है। इस प्रदर्शनी में भाप से चलने वाले इंजन से लेकर आने वाले समय की बुलेट ट्रेन को भी दर्शाया गया है। रेलवे द्वारा 63वें रेल सप्ताह समारोह के उपलक्ष्य में आयोजित तीन दिवसीय प्रदर्शनी का शुभारंभ रविवार को रेलवे बोर्ड अश्विनी लोहानी ने किया। इस प्रदर्शनी में सेल्फी पॉइंट युवाओं के लिए खास आकर्षण का केंद्र बने। वही बच्चों ने 1853 में पहली बार चले स्टीम इंजन की झलकियों को जीवंत रूप में देखा।

इस प्रदर्शनी में भोपाल स्टेशन रीडेवलपमेंट का मॉडल भी आकर्षण का केंद्र बना। यह मॉडल भोपाल स्टेशन पर भविष्य में उपलब्ध कराई जाने वाली सुविधाओं को दर्शा रहा है।

प्रदर्शनी के पहले दिन बड़ी संख्या में बच्चों से लेकर बुजुर्गो तक का जमावड़ा रहा। छुट्टी के कारण भारी भीड़ रही और लोगों ने रेल की विकास यात्रा को समझा।

न्यूज स्त्रोत आईएएनएस


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बहुत ही मुश्किल है अपने बारे में लिखना । इसलिए ज्यादा कुछ नहीं, मैं बहुत ही सरल व्यतित्व का व्यक्ति हूं । खुशमिजाज हूं ए इसलिए चेहरे पर हमेशा खुशी रहती हैए और मुझे अकेला रहना ज्यादा पंसद है। मेरा स्वभाव है कि मेरी बजह से किसी का कोई नुकसान नहीं होना चाहिए और ना ही किसी का दिल दुखना चाहिए। चाहे वो व्यक्ति अच्छा हो या बुरा। मेरे इस स्वभाव के कारण कभी कभी मुझे खामियाजा भी भुगतान पड़ता है। मैं अक्सर उनके बारे में सोचकर भुला देता हूं क्योंकि खुश रहने का हुनर सिर्फ मेरे पास है। मेरी अपनी विचारए विचारधारा है जिसे में अभिव्यक्त करता रहता हूं । जिन लोगों के विचारों से कभी प्रभावित भी होता हूं तो उन्हें फोलो कर लेता हूं । अभी सफर की शुरुआत है मैने कंप्यूटर ऑफ माटर्स की डिग्री हासिल की है और इस मीडीया क्षेत्र में अभी नया हूं। मगर मुझे अब इस क्षेत्र में काम करना अच्छा लग रहा है। और फिर इसी में काम करने का मन बना लेना दूसरों के लिये अश्चर्य पूर्ण होगा। लेकिन इससे पहले और आज भी ब्लागर ने एक मंच दिया चिठ्ठा के रुप में, जहां बिना रोक टोक के आसानी से सबकुछ लिखा या बताया जा सका। कभी कभी मन में उठ रही बातों या भावों को शब्दों में पिरोयाए उनमें खुद की और दूसरों की कहानी कही। कभी उनके द्वारा किसी को पुकाराए तो कभी खुद ही रूठ गया। कई बार लिखने पर भी मन सतुष्ट नहीं हुआ और निरंतर कुछ नया लिखने मन बनता रहता है। अजीब सी बेचैनी जो न जाने क्या करवाएगी और कितना कुछ कर गुजर जाने की तमन्ना लिए निकले हैं इन सफरों, जहां उम्मीद और विश्वास दोनों कायम हैं जो अर्जुन के भांति लक्ष्य को भेद देंगे । मुझे अभी अपने जीवन में बहुत कुछ करना है किसी के सपनों को पूरा करना हैं । अब तो बस मेरा एक ही लक्ष्य हैं कि मैं बस उसके सपने पूरें करू।

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