ब्रह्मांड विस्तार कर रहा है लेकिन ग्रह नहीं हो रहे है एक दूसरे से दूर, जानियें इसका सच

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जयपुर। ब्रह्मांड के विस्तार को समझना थोड़ा जटिल विषय है। इस पर लाल विचलन का हमारा निरीक्षण यह बताता है कि हमारे समीप की आकाशगंगाओं के सापेक्ष तीन गु्णा दूरी पर के पिंड तीन गुणा अधिक तेजी से दूर जा रहे है। वैज्ञानिकों ने कई शोध करके पता किया है कि  हम अंतरिक्ष मे जीतनी अधिक दूरी पर देखते है, आकाशगंगाओ के दूर जाने की गति उतनी अधिक होते जा रही है, इनकी दूर जाने की गति आसानी से प्रकाशगति को पार कर जाती है। लेकिन प्रकाशगति किसी भी पिंड के गति करने की अधिकतम सीमा मानी गई है। तो प्रकाशगति को पार करना संभव नहीं है। इस बात को सब मान चुके है कि ब्रह्मांड उसके आगे भी है जहाँ तक हम देख नही पा रहे है।

वैज्ञानिक कल्पना कर रहे है कि यदि इन सभी पिंडो को 14.8 अरब वर्ष पहले वाले के अंतरिक्ष मे रख दे तो ब्रह्मांड मे पिंडो की भीड़ मच जायेगी। लोगों का मानना है कि ब्रह्मांड का आकार उसकी उम्र के बराबर होना चाहीये। आपको बता दे कि ब्रह्मांड का जन्म आज से 14.8 अरब वर्ष पहले हुआ था,  बिग बैंग के पहले कुछ क्षणो  काल-अंतरिक्ष के विस्तार की गति प्रकाश गति से अधिक थी। बता दे कि उस समय को स्फ़िति काल कहते है। इस आरंभिक स्फ़िति काल के समाप्त होने के पश्चात विस्तार गति धीमी हो गई थी। वर्तमान में वैज्ञानिकों द्वारा माना जाता है कि इन पिंडो को एक रहस्यमय बल जिसे श्याम ऊर्जा कहते है, खींच कर दूर कर रही है।

जिससे ब्रह्मांड का विस्तार प्रकाश गति से तेज हो रहा है। लेकिन बता दे कि इस विस्तार गति का अर्थ वह नही है सापेक्षतावाद के नियमो के अनुसार कोई पिंड काल-अंतरिक्ष मे प्रकाशगती से तेज गति नही कर सकता है। लेकिन सापेक्षतावाद इस पर ऐसी कोई पाबंदी भी नही लगाता है। यही कारण है कि अंतरिक्ष मे आकाशगंगाये किसी भी नियम का उल्लंघन नही कर रहे है क्योंकि वे अंतरिक्ष मे प्रकाश गति से तेज गति नही कर ही नहीं रहे है। इसकी बजाय समझा जाता है कि अंतरिक्ष का हर भाग अपना विस्तार कर रहा है। लेकिन सच यह है कि पिंड एक दूसरे से दूर नही जा रहे है, उनके मध्य का अंतरिक्ष का विस्तार हो रहा है।

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