भूतों की रहस्यमयी दुनियां से पर्दा उठाती सच्चाई, जानकर दिल दहल जाएगा आपका

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जयपुर, दुनिया के प्रत्येक देश में भूतों को लेकर लोगों की अलग अलग धारणाएं है। कुछ लोगों का मानना है कि भूत होते है। जबकि कुछ लोगों का कहना होता है यह इंसान की दिमागी सौच का फर्क होता है। पश्चिमीं देशों में हैलोवीन त्यौहार मनाया जाता है। जिसमे भूत प्रेतों को लेकर अजीब तरह की नुमाइश की जाती है।

बता दें कि यहां पर पहले से मरे हुए लोगों को जमीन पर लाने का अनुभव किया जाता है। दोस्तों इस दौरान भूतों पर कई तरह की बाते बताई जाती है। अब आपको यह बताते है कि यह पर्व क्यों मनाया जाता है। ईसा से बहुत पहले के भूमध्य सागर और यूरोप में रहने वाले लोग सेल्टिक जबानें बोलते थे।

क्योंकि इन लोगों का मानना था कि वह भूतों मे विश्वास करते है। क्योंकि पहले भूतों और देवताओं के बीच भी युद्ध हुआ करता था। जिसके चलते लोग समहैन त्यौहार मनाते थे। क्योंकि उन लोगों का सौचना था कि ऐसा करने से उनके और भूतों की दुनिया के बीच का फासला खत्म हो जाता है।

इंसान और प्रेत एक साथ धरती पर आबाद रहते हैं। इसके बाद सातवी सदी मे जब लोग इसाई धर्म का प्रचार कर रहे थे तो पोप ग्रेगरी ने लोगों से कहा था कि वह ऐसे लोगों का विरोध नहीं करे। जो भूत को नहीं मानते है। बल्कि उनको ईशकरण के बारे में समझाए।

भूतों पर ये यकीन, प्राचीन कालीन यूरोप में चर्च के लिए बहुत फायदे का सौदा साबित हुआ। क्योंकि पहले पोप ने लोगों से कहा था कि जब भी भूत देखे तो ईश से प्रार्थना करे। इसके बाद धीरे धीरे यह एक यकीन में बदल गया। जहां लोग की चर्चा का विषय बन गया। औऱ लोग भूत प्रेत पर विश्वास करले लगे। धीरे धीरे यह अंधविश्वास कई सारी शाखाओं मे बट गया।

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