Supreme Court ने कानून के छात्र की मौत की नए सिरे से जांच के आदेश दिए

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सुप्रीम कोर्ट ने जोधपुर स्थित नेशनल लॉ यूनिवर्सिटी में तृतीय वर्ष के छात्र की रहस्यमय मौत के करीब तीन साल बाद बड़ा फैसला सुनाया है। शीर्ष अदालत ने बुधवार को दो महीने के भीतर नए सिरे से मामले की जांच करने के निर्देश जारी किए हैं। राज्य पुलिस से केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) को स्थानांतरित करने की मांग करने वाली याचिका पर आदेश सुनाते हुए पुलिस को नए सिरे से मामले की जांच करने के निर्देश दिए गए हैं।

पीड़ित विक्रांत नगाइच की मां नीतू कुमार नगाइच ने वकील सुनील फर्नांडिस के माध्यम से याचिका दायर की है। मामले की तीन साल बाद भी इसकी जांच में कोई प्रगति नहीं हो रही थी, इसलिए सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की गई थी।

जुलाई में शीर्ष अदालत ने कहा था कि जांच दो महीने के भीतर पूरी होनी चाहिए और इसके पहले एक अंतिम रिपोर्ट दायर की जानी चाहिए।

न्यायमूर्ति आर. एफ. नरीमन, न्यायमूर्ति नवीन सिन्हा और न्यायमूर्ति इंदिरा बनर्जी की पीठ ने राजस्थान पुलिस द्वारा दाखिल क्लोजर रिपोर्ट को रद्द कर दिया है।

पीठ ने कहा कि इस मामले में काफी समय बीत चुका है और निस्संदेह अब इस मामले को तत्काल निपटाया जाना चाहिए। पीठ ने कहा कि नए सिरे से जांच आज (बुधवार) से अधिकतम दो महीने के भीतर समाप्त हो जानी चाहिए।

पीठ ने क्लोजर रिपोर्ट में लापरवाही बरतने और तय समय पर रिपोर्ट दाखिल नहीं करने पर राजस्थान पुलिस को फटकार भी लगाई।

पीठ ने कहा कि उनके सामने अचानक एक बहुत लंबी जांच रिपोर्ट तो दर्ज कर दी गई, मगर इसमें मौत को लेकर कोई सुराग नहीं है।

पीड़ित 13 अगस्त, 2017 की शाम को अपने दोस्तों के साथ विश्वविद्यालय परिसर से लगभग 300 मीटर दूर एक रेस्तरां में गया था। उसका शव अगली सुबह एक रेलवे ट्रैक के पास मिला। पीड़िता की मां ने दलील दी है कि पुलिस की ओर से घटना की रात उनके बेटे के ठिकाने का पता लगाने के लिए उसके मोबाइल फोन का डेटा हासिल करना बाकी है।

याचिकाकर्ता ने जोर देकर कहा कि वह अपने बेटे की मौत की जांच से संतुष्ट नहीं हैं। उन्होंने कहा कि वह अपने एकमात्र बच्चे की मौत के बाद पूरी तरह से टूट गई हैं।

न्यजू स्त्रोत आईएएनएस

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