पूर्व प्रधानमंत्री चंद्रशेखर की छठी किताब का लोकार्पण 8 जुलाई को

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देश के दिवंगत समाजवादी प्रधानमंत्री चंद्रशेखर के विचारों पर केंद्रित छठी पुस्तक का लोकार्पण 8 जुलाई को उनकी 11वीं पुण्यतिथि पर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ करेंगे। विधानसभा अध्यक्ष हृदयनारायण दीक्षित इस लोकार्पण समारोह की अध्यक्षता करेंगे।

उत्तर प्रदेश विधानसभा के सेंट्रल हाल में दिन के साढ़े 11 बजे से होने वाले इस समारोह में योगी सरकार के कैबिनेट मंत्री सुरेश खन्ना, स्वामी प्रसाद मौर्य और रमापति शास्त्री विशेष रूप से उपस्थित रहेंगे। चंद्रशेखर ट्रस्ट के संरक्षक एवं विधान परिषद सदस्य यशवंत सिंह ने आईपीएन को बताया कि चंद्रशेखर ट्रस्ट का उद्देश्य है, समाजवादी विचारों को जन जन तक पहुंचाना।

उन्होंने बताया कि छठी पुस्तक ‘राष्ट्रपुरुष चंद्रशेखर : संसद में दो टूक भी संसद में दिए गए उनके भाषणों पर ही केंद्रित है।

​न्यूज स्त्रोत आईएएनएस


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बहुत ही मुश्किल है अपने बारे में लिखना । इसलिए ज्यादा कुछ नहीं, मैं बहुत ही सरल व्यतित्व का व्यक्ति हूं । खुशमिजाज हूं ए इसलिए चेहरे पर हमेशा खुशी रहती हैए और मुझे अकेला रहना ज्यादा पंसद है। मेरा स्वभाव है कि मेरी बजह से किसी का कोई नुकसान नहीं होना चाहिए और ना ही किसी का दिल दुखना चाहिए। चाहे वो व्यक्ति अच्छा हो या बुरा। मेरे इस स्वभाव के कारण कभी कभी मुझे खामियाजा भी भुगतान पड़ता है। मैं अक्सर उनके बारे में सोचकर भुला देता हूं क्योंकि खुश रहने का हुनर सिर्फ मेरे पास है। मेरी अपनी विचारए विचारधारा है जिसे में अभिव्यक्त करता रहता हूं । जिन लोगों के विचारों से कभी प्रभावित भी होता हूं तो उन्हें फोलो कर लेता हूं । अभी सफर की शुरुआत है मैने कंप्यूटर ऑफ माटर्स की डिग्री हासिल की है और इस मीडीया क्षेत्र में अभी नया हूं। मगर मुझे अब इस क्षेत्र में काम करना अच्छा लग रहा है। और फिर इसी में काम करने का मन बना लेना दूसरों के लिये अश्चर्य पूर्ण होगा। लेकिन इससे पहले और आज भी ब्लागर ने एक मंच दिया चिठ्ठा के रुप में, जहां बिना रोक टोक के आसानी से सबकुछ लिखा या बताया जा सका। कभी कभी मन में उठ रही बातों या भावों को शब्दों में पिरोयाए उनमें खुद की और दूसरों की कहानी कही। कभी उनके द्वारा किसी को पुकाराए तो कभी खुद ही रूठ गया। कई बार लिखने पर भी मन सतुष्ट नहीं हुआ और निरंतर कुछ नया लिखने मन बनता रहता है। अजीब सी बेचैनी जो न जाने क्या करवाएगी और कितना कुछ कर गुजर जाने की तमन्ना लिए निकले हैं इन सफरों, जहां उम्मीद और विश्वास दोनों कायम हैं जो अर्जुन के भांति लक्ष्य को भेद देंगे । मुझे अभी अपने जीवन में बहुत कुछ करना है किसी के सपनों को पूरा करना हैं । अब तो बस मेरा एक ही लक्ष्य हैं कि मैं बस उसके सपने पूरें करू।

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