फील्डरों के लिए परिस्थति मुश्किल थी : Shreyas Iyer

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दिल्ली कैपिटल्स ने शुक्रवार को आईपीएल-13 में चेन्नई सुपर किंग्स को 44 रनों से हरा कर अपनी दूसरी जीत दर्ज की। इस मैच में हालांकि दिल्ली की फील्डिंग अच्छी नहीं रही थी, लेकिन टीम के कप्तान श्रेयस अय्यर ने कहा कि वह फील्डरों को ज्यादा कुछ नहीं कहेंगे क्योंकि परिस्थितियां ठीक नहीं थीं। शिमरन हेटमायेर ने फाफ डु प्लेसिस के दो कैच छोड़े। ग्राउंड फील्डिंग में भी दिल्ली की टीम कमजोर रही।

मैच के बाद अय्यर ने कहा, “मैं अपनी टीम के प्रदर्शन से काफी खुश हूं। मैं फील्डरों को संदेह का लाभ दूंगा क्योंकि यह कैच के लिए अच्छी स्थितियां नहीं हैं। लाइटिंग के कारण परेशानी होती है। कई बार आप गेंद को जज नहीं कर पाते हो। आप पूरी मेहनत से कैच पकड़ने जाते हो और गेंद काफी तेजी से आती है। आपको पता नहीं होता कि आपको अपने आप को कहां रखना है।”

दिल्ली की यह लगातार दूसरी जीत है जबकि चेन्नई को तीन मैचों में दूसरी हार का सामना करना पड़ा है।

न्यूज स्त्रोत आईएएनएस

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बहुत ही मुश्किल है अपने बारे में लिखना । इसलिए ज्यादा कुछ नहीं, मैं बहुत ही सरल व्यतित्व का व्यक्ति हूं । खुशमिजाज हूं ए इसलिए चेहरे पर हमेशा खुशी रहती हैए और मुझे अकेला रहना ज्यादा पंसद है। मेरा स्वभाव है कि मेरी बजह से किसी का कोई नुकसान नहीं होना चाहिए और ना ही किसी का दिल दुखना चाहिए। चाहे वो व्यक्ति अच्छा हो या बुरा। मेरे इस स्वभाव के कारण कभी कभी मुझे खामियाजा भी भुगतान पड़ता है। मैं अक्सर उनके बारे में सोचकर भुला देता हूं क्योंकि खुश रहने का हुनर सिर्फ मेरे पास है। मेरी अपनी विचारए विचारधारा है जिसे में अभिव्यक्त करता रहता हूं । जिन लोगों के विचारों से कभी प्रभावित भी होता हूं तो उन्हें फोलो कर लेता हूं । अभी सफर की शुरुआत है मैने कंप्यूटर ऑफ माटर्स की डिग्री हासिल की है और इस मीडीया क्षेत्र में अभी नया हूं। मगर मुझे अब इस क्षेत्र में काम करना अच्छा लग रहा है। और फिर इसी में काम करने का मन बना लेना दूसरों के लिये अश्चर्य पूर्ण होगा। लेकिन इससे पहले और आज भी ब्लागर ने एक मंच दिया चिठ्ठा के रुप में, जहां बिना रोक टोक के आसानी से सबकुछ लिखा या बताया जा सका। कभी कभी मन में उठ रही बातों या भावों को शब्दों में पिरोयाए उनमें खुद की और दूसरों की कहानी कही। कभी उनके द्वारा किसी को पुकाराए तो कभी खुद ही रूठ गया। कई बार लिखने पर भी मन सतुष्ट नहीं हुआ और निरंतर कुछ नया लिखने मन बनता रहता है। अजीब सी बेचैनी जो न जाने क्या करवाएगी और कितना कुछ कर गुजर जाने की तमन्ना लिए निकले हैं इन सफरों, जहां उम्मीद और विश्वास दोनों कायम हैं जो अर्जुन के भांति लक्ष्य को भेद देंगे । मुझे अभी अपने जीवन में बहुत कुछ करना है किसी के सपनों को पूरा करना हैं । अब तो बस मेरा एक ही लक्ष्य हैं कि मैं बस उसके सपने पूरें करू।

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