तीर्थयात्रियों का दूसरा जत्था करतारपुर कॉरिडोर से पाकिस्तान पहुंचा

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करतारपुर कॉरिडोर के जरिए 225 आम तीर्थयात्रियों के एक समूह ने रविवार को भारतीय सीमा पार की और पाकिस्तान के नारोवाल जिले के ऐतिहासिक गुरुद्वारा में माथा टेका। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शनिवार को करतारपुर कॉरिडोर पर इंटीग्रेटेड चेकपोस्ट का उद्घाटन किया। यह सात दशक में भारत व पाकिस्तान के बीच पहला धार्मिक संपर्क है।

इसके साथ ही उन्होंने दरबार साहिब गुरुद्वारा की यात्रा करने वाले 500 हाई प्रोफाइल तीर्थयात्रियों के पहले जत्थे को हरी झंडी दिखाई। दरबार साहिब गुरुद्वारा को करतारपुर साहिब के नाम से भी जानते हैं। सिख धर्म के संस्थापक गुरु नानक देव ने अपनी जिंदगी के अंतिम समय यहीं पर गुजारे थे, जो अब पाकिस्तान में है।

इंटीग्रेटेड चेकपोस्ट के उद्घाटन से गुरुद्वारा करतारपुर साहिब की यात्रा करने वाले तीर्थयात्रियों को बिना वीजा के सुबह से शाम तक की यात्रा की सुविधा मिलती है। हालांकि, भक्त द्वारा ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन कराने पर पासपोर्ट व 20 डॉलर के सेवा शुल्क का भुगतान करना होगा।

भारत ने 24 अक्टूबर को पाकिस्तान के साथ 4.2 किमी लंबे चार लेन वाले करतारपुर साहिब कॉरिडोर के परिचालन के तौर-तरीकों को लेकर एक समझौते पर हस्ताक्षर किया।

दोनों देशों ने 5000 भारतीय तीर्थयात्रियों की रोजाना यात्रा पर सहमति जताई है।

अधिकारियों ने रविवार को आईएएनएस से कहा कि शुरुआत में रोजाना यात्रा के लिए 500 तीर्थयात्रियों के लिए व्यवस्था की गई है।

गुरदीप सिंह, करतारपुर साहिब गुरुद्वारा से लौटे हैं। वह पाकिस्तानी अधिकारियों की व्यवस्थाओं व आतिथ्य से प्रभावित हैं।

उन्होंने आईएएनएस से कहा, “हमने इंटीग्रेटेड चेक पोस्ट को सुबह में पार किया। वहां कई घंटे बिताने के बाद वह सूर्यास्त से पहले भारत लौट आए।”

उन्होंने कहा कि पाकिस्तानी अधिकारियों ने गर्मजोशी से भारतीय तीर्थयात्रियों का स्वागत किया और वहां उनकी स्वतंत्र आवाजाही पर कोई रोक नहीं थी।

न्यूज स्त्रोत आईएएनएस


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