स्कूल में सरेआम होता था ज्यादा देर तक संबंध बनाने का कंप्टीशन, लड़कियों का हो जाता था ऐसा बुरा हाल…

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सूत्रों के अनुसार बताया जा रहा है कि, यूनाइटेड किंगडम के बकिंघम का प्रतिष्ठित स्टोव स्कूल विवादों में घिर गया है क्योंकि यहां की एक पूर्व छात्रा ने इस बात का दावा किया है कि, यहां स्टूडेंट्स आपस में खुलेआम शारीरिक संबंध बनाते हैं । इसके आगे लिव स्टीवन्स ने भी कहा है कि, स्कूल में पढ़ने वाले स्टूडेंट्स आपस में खुलेआम संबंध बनाते है और इसके लिए अजीबोगरीब शर्त तक लगाते है इतना ही नहीं, इसके बारे में स्कूल प्रबंधन को भी पूरी जानकारी होती है मगर वो भी इसके लिए कुछ भी नहीं करते है ।

लिव स्टीवन्स ने इसके आगे जानकारी देते हुए बताया है कि स्कूल के छात्रों ने इस गेम का नाम ‘टेम्पल चैलेंज’ रखा है । इस खेल में 750 एकड़ में फैली स्कूल की 40 इमारतों में सेक्स करने को लेकर प्रतियोगिता होती थी। लिव ने आगे जानकारी देते हुए बताया है कि, स्कूल में ये गेम कोई ‘वन नाइट स्टैंड’ नहीं थे, बल्कि ज्यादातर जोड़े एक-दूसरे से प्यार करते थे।

 


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बहुत ही मुश्किल है अपने बारे में लिखना । इसलिए ज्यादा कुछ नहीं, मैं बहुत ही सरल व्यतित्व का व्यक्ति हूं । खुशमिजाज हूं ए इसलिए चेहरे पर हमेशा खुशी रहती हैए और मुझे अकेला रहना ज्यादा पंसद है। मेरा स्वभाव है कि मेरी बजह से किसी का कोई नुकसान नहीं होना चाहिए और ना ही किसी का दिल दुखना चाहिए। चाहे वो व्यक्ति अच्छा हो या बुरा। मेरे इस स्वभाव के कारण कभी कभी मुझे खामियाजा भी भुगतान पड़ता है। मैं अक्सर उनके बारे में सोचकर भुला देता हूं क्योंकि खुश रहने का हुनर सिर्फ मेरे पास है। मेरी अपनी विचारए विचारधारा है जिसे में अभिव्यक्त करता रहता हूं । जिन लोगों के विचारों से कभी प्रभावित भी होता हूं तो उन्हें फोलो कर लेता हूं । अभी सफर की शुरुआत है मैने कंप्यूटर ऑफ माटर्स की डिग्री हासिल की है और इस मीडीया क्षेत्र में अभी नया हूं। मगर मुझे अब इस क्षेत्र में काम करना अच्छा लग रहा है। और फिर इसी में काम करने का मन बना लेना दूसरों के लिये अश्चर्य पूर्ण होगा। लेकिन इससे पहले और आज भी ब्लागर ने एक मंच दिया चिठ्ठा के रुप में, जहां बिना रोक टोक के आसानी से सबकुछ लिखा या बताया जा सका। कभी कभी मन में उठ रही बातों या भावों को शब्दों में पिरोयाए उनमें खुद की और दूसरों की कहानी कही। कभी उनके द्वारा किसी को पुकाराए तो कभी खुद ही रूठ गया। कई बार लिखने पर भी मन सतुष्ट नहीं हुआ और निरंतर कुछ नया लिखने मन बनता रहता है। अजीब सी बेचैनी जो न जाने क्या करवाएगी और कितना कुछ कर गुजर जाने की तमन्ना लिए निकले हैं इन सफरों, जहां उम्मीद और विश्वास दोनों कायम हैं जो अर्जुन के भांति लक्ष्य को भेद देंगे । मुझे अभी अपने जीवन में बहुत कुछ करना है किसी के सपनों को पूरा करना हैं । अब तो बस मेरा एक ही लक्ष्य हैं कि मैं बस उसके सपने पूरें करू।

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