महामारी के मुकाबले में चीनी ई-कॉमर्स की भूमिका प्रशंसनीय : ब्राजील की विद्वान

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हार्वर्ड यूनिवर्सिटी के ब्राजील की शोधकर्ता, अलीबाबा बिजनेस स्कूल की प्रोफेसर डॉ. रेनाटा थिबॉर्ग ने हाल ही में कहा कि महामारी के वैश्विक मुकाबले में चीनी ई-कॉमर्स कंपनियों ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। उन्होंने न केवल अपने देश के महामारी के मुकाबले में योगदान दिया, बल्कि दुनिया के अन्य देशों को सहायता दी।

रेनाटा थिबॉर्ग ने सीएमजी को दिये इंटरव्यू में कहा कि चीन के ई-कॉमर्स उद्योग ने पिछले दस सालों में एक परिपक्व औद्योगिक पारिस्थितिकी तंत्र विकसित किया है। मोबाइल भुगतान, लॉजिस्टिक्स नेटवर्क और बुनियादी सुविधा बहुत पूर्ण हो चुकी हैं। इसके अलावा विभिन्न नई प्रौद्योगिकियां एक-एक करके उभर रही हैं।

उन्होंने कहा कि महामारी के दौरान चीन के ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म और ऑनलाइन शॉपिंग तेजी से विकसित हो रहे हैं और कुछ उत्पादों और उद्यमों की ऑनलाइन बिक्री में प्रकोप से पहले की तुलना में भारी वृद्धि हुई। लोगों ने महामारी के दौरान अपनी पारंपरिक खरीद की आदतों को बदल कर ई-कॉमर्स प्लेटफार्मों पर अधिक भरोसा किया।

रेनाटा थिबॉर्ग ने कहा कि उदाहरण के लिए अलीबाबा ग्रुप दुनिया भर में अपने अत्यधिक कुशल लॉजिस्टिक नेटवर्क और आपूर्ति श्रृंखला का प्रयोग करते हुए महामारी की राहत सामग्री और अन्य उत्पादों को जल्दी से दुनिया भर में वितरित करता है। महामारी के मुकाबले में अफ्रीका, एशिया और लैटिन अमेरिका के कुछ देशों को भी जल्दी से चिकित्सा सामग्री भेजी गयी। अलीबाबा ने कई देशों को महामारी की रोकथाम और नियंत्रण में चिकित्सा सामग्री देकर योगदान किया।

उन्होंने दुनिया के सभी देशों से एकजुटता और सहयोग को मजबूत करने और भविष्य में वैश्विक आर्थिक बहाली को बढ़ावा देने के लिए नए उद्योग तैयार करने का आह्वान किया।

न्यूज स्त्रोत आईएएनएस

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बहुत ही मुश्किल है अपने बारे में लिखना । इसलिए ज्यादा कुछ नहीं, मैं बहुत ही सरल व्यतित्व का व्यक्ति हूं । खुशमिजाज हूं ए इसलिए चेहरे पर हमेशा खुशी रहती हैए और मुझे अकेला रहना ज्यादा पंसद है। मेरा स्वभाव है कि मेरी बजह से किसी का कोई नुकसान नहीं होना चाहिए और ना ही किसी का दिल दुखना चाहिए। चाहे वो व्यक्ति अच्छा हो या बुरा। मेरे इस स्वभाव के कारण कभी कभी मुझे खामियाजा भी भुगतान पड़ता है। मैं अक्सर उनके बारे में सोचकर भुला देता हूं क्योंकि खुश रहने का हुनर सिर्फ मेरे पास है। मेरी अपनी विचारए विचारधारा है जिसे में अभिव्यक्त करता रहता हूं । जिन लोगों के विचारों से कभी प्रभावित भी होता हूं तो उन्हें फोलो कर लेता हूं । अभी सफर की शुरुआत है मैने कंप्यूटर ऑफ माटर्स की डिग्री हासिल की है और इस मीडीया क्षेत्र में अभी नया हूं। मगर मुझे अब इस क्षेत्र में काम करना अच्छा लग रहा है। और फिर इसी में काम करने का मन बना लेना दूसरों के लिये अश्चर्य पूर्ण होगा। लेकिन इससे पहले और आज भी ब्लागर ने एक मंच दिया चिठ्ठा के रुप में, जहां बिना रोक टोक के आसानी से सबकुछ लिखा या बताया जा सका। कभी कभी मन में उठ रही बातों या भावों को शब्दों में पिरोयाए उनमें खुद की और दूसरों की कहानी कही। कभी उनके द्वारा किसी को पुकाराए तो कभी खुद ही रूठ गया। कई बार लिखने पर भी मन सतुष्ट नहीं हुआ और निरंतर कुछ नया लिखने मन बनता रहता है। अजीब सी बेचैनी जो न जाने क्या करवाएगी और कितना कुछ कर गुजर जाने की तमन्ना लिए निकले हैं इन सफरों, जहां उम्मीद और विश्वास दोनों कायम हैं जो अर्जुन के भांति लक्ष्य को भेद देंगे । मुझे अभी अपने जीवन में बहुत कुछ करना है किसी के सपनों को पूरा करना हैं । अब तो बस मेरा एक ही लक्ष्य हैं कि मैं बस उसके सपने पूरें करू।

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