सरकारी बैंकों की शाखाओं में ग्राहकों के साथ संबंध पहले जैसा नहीं : वित्तमंत्री

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वित्तमंत्री निर्मला सीतारमण ने बुधवार को कहा कि सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों की शाखाओं में ग्राहकों के साथ खराब संबंधों के कारण कर्ज को प्रोत्साहन नहीं मिल रहा है। उन्होंने कहा कि पीएसयू बैंकों की शाखाओं में ग्राहकों के साथ संबंध पहले जैसा नहीं है। इंडियन बैंक्स एसोसिएशन (आईबीए) द्वारा आयोजित एक कार्यक्रम में वित्तमंत्री ने कहा, “पीएसयू बैंकों में शाखा स्तर पर ग्राहकों के साथ संबंध पहले जैसा नहीं है।” कार्यक्रम के दौरान बैंकों के कामकाज पर ईज 3.0 रिपोर्ट जारी की गई।

ईज 3.0 सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों का एक विजन डॉक्यूमेंट है जिसमें बेहतर बैंकिंग सेवा का जिक्र किया गया है।

वित्तमंत्री ने कहा कि ग्राहक बैंक की शाखाओं के कर्मचारियों के साथ व्यक्तिगत संपर्क की अपेक्षा करते हैं। उन्होंने कहा कि बैंकों को शाखा स्तर पर बैंक की भावना के साथ काम करना चाहिए जिसका मकसद ग्राहकों के साथ सीधा संपर्क करना है।

उन्होंने कहा कि बैंकों के कई कर्मचारियों को सरकारी योजनाओं की जानकारी नहीं है।

वित्तमंत्री ने कहा कि आईबीए को सरकारी योजनाओं के संबंध में जानकारी देने के मकसद से बैंकों की शाखाओं के लिए कार्य करना चाहिए।

न्यूज स्त्रोत आईएएनएस

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बहुत ही मुश्किल है अपने बारे में लिखना । इसलिए ज्यादा कुछ नहीं, मैं बहुत ही सरल व्यतित्व का व्यक्ति हूं । खुशमिजाज हूं ए इसलिए चेहरे पर हमेशा खुशी रहती हैए और मुझे अकेला रहना ज्यादा पंसद है। मेरा स्वभाव है कि मेरी बजह से किसी का कोई नुकसान नहीं होना चाहिए और ना ही किसी का दिल दुखना चाहिए। चाहे वो व्यक्ति अच्छा हो या बुरा। मेरे इस स्वभाव के कारण कभी कभी मुझे खामियाजा भी भुगतान पड़ता है। मैं अक्सर उनके बारे में सोचकर भुला देता हूं क्योंकि खुश रहने का हुनर सिर्फ मेरे पास है। मेरी अपनी विचारए विचारधारा है जिसे में अभिव्यक्त करता रहता हूं । जिन लोगों के विचारों से कभी प्रभावित भी होता हूं तो उन्हें फोलो कर लेता हूं । अभी सफर की शुरुआत है मैने कंप्यूटर ऑफ माटर्स की डिग्री हासिल की है और इस मीडीया क्षेत्र में अभी नया हूं। मगर मुझे अब इस क्षेत्र में काम करना अच्छा लग रहा है। और फिर इसी में काम करने का मन बना लेना दूसरों के लिये अश्चर्य पूर्ण होगा। लेकिन इससे पहले और आज भी ब्लागर ने एक मंच दिया चिठ्ठा के रुप में, जहां बिना रोक टोक के आसानी से सबकुछ लिखा या बताया जा सका। कभी कभी मन में उठ रही बातों या भावों को शब्दों में पिरोयाए उनमें खुद की और दूसरों की कहानी कही। कभी उनके द्वारा किसी को पुकाराए तो कभी खुद ही रूठ गया। कई बार लिखने पर भी मन सतुष्ट नहीं हुआ और निरंतर कुछ नया लिखने मन बनता रहता है। अजीब सी बेचैनी जो न जाने क्या करवाएगी और कितना कुछ कर गुजर जाने की तमन्ना लिए निकले हैं इन सफरों, जहां उम्मीद और विश्वास दोनों कायम हैं जो अर्जुन के भांति लक्ष्य को भेद देंगे । मुझे अभी अपने जीवन में बहुत कुछ करना है किसी के सपनों को पूरा करना हैं । अब तो बस मेरा एक ही लक्ष्य हैं कि मैं बस उसके सपने पूरें करू।

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