भारतियों में घटी कुपोषण की दर पर उसकी जगह ले ली है मोटापे की समस्या ने

भारत में कुपोषण की दर कई सालों से बहुत ज्यादा बढ़ी हुई थी । यहाँ पर बच्चे हेल्दी कम और कुपोषित बहुत ज्यादा होते थे । उनके खान पान और पोषण कीकमी के कारण

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जयपुर । भारत में कुपोषण की दर कई सालों से बहुत ज्यादा बढ़ी हुई थी । यहाँ पर बच्चे हेल्दी कम और कुपोषित बहुत ज्यादा होते थे । उनके खान पान और पोषण कीकमी के कारण इस परेशानी का मुंह भारत की जनता को देखना पड़ा पर । सरकार के कुछ अच्छे प्रयासों के चलते इस परेशानी पर धीरे धीरे काबू पा लिया गया और इस दर में कमी आई ।

कुपोषण की दर में कमी आना बहुत ही अच्छी बात है पर इसके साथ ही इस कुपोषण की दर की कमी में जगह लेली है मोटापे ने । एक सर्वे के अनुसार यह बात सामने आई है की आज हर तीसरा आदमी मोटापे की बीमारी का शिकार होता ही जा रहा है यदि इस पर काबू नहीं किया गया तो यह महामारी का रूप लेते देर नहीं करेगा ।

देश में भूख के संकट का असर कम हो रहा है, लेकिन मोटापा सेहत के लिए नए मुद्दे के रूप में उभर रहा है। विश्व में 2019 में खाद्य सुरक्षा की स्थिति और पोषण पर जारी हुई रिपोर्ट के अनुसार भारत में मोटापे के शिकार लोगों की संख्या 2012 में 2 करोड़ 40 लाख थी वो 2016 में बढ़कर 3 करोड़ 28 लाख हो गई है।

भारत में कुपोषित लोगों की तादाद 2004-06 में 25 करोड़ 39 लाख थी, जो 2016-18 में गिरकर 19 करोड़ 44 लाख रह गई है। वहीं 18 साल या उससे अधिक आयु के मोटापे के शिकार लोगों की संख्या 2 करोड़ 40 लाख से बढ़कर 3 करोड 28 लाख लाख हो गई। 5 साल की आयु के अधिक वजन वाले बच्चों की संख्या 2018 में 29 लाख थी।

 

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