जेल में बात करता पकड़ा गया कैदी तो निगल गया मोबाइल, जानिए फिर क्या हुआ…

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हम सब इस बात को अच्छी तरह से जानते हैं कि जेल मे आप किसी भी ऐसी चीज का उपयोग नहीं कर सकते हैं जिसको जेल प्रभारी ने बंद कर रखा है । कुछ ऐसा ही हादसा पश्चिम बंगाल की एक जेल में हुआ । बताया जा रहा है कि यहां पर प्रेसीडंसी सेंट्रल जेल में एक कैदी मोबाइल पर बात कर रहा था । जिसके बाद उसको किसी सुरक्षा कर्मी ने देख लिया । ​उसके बाद में उस कैदी के साथ कुछ ऐसा हुआ जिसको जानकर आप भी चौक जाएंगे ।

बताया जा रहा है कि इस कैदी का नाम राम चंद्रा हैं । आपको बता दें कि, यह शख्स चोरी और लूटपाट के आरोप में जेल में बंद हुआ था । जेल में मोबाइल फोन निगलने की घटना सोमवार की ही है, इसके बारे में जेल के प्रभारी ने किसी को भी नहीं बताया । जेल प्रबंधन के अनुसार बताया जा रहा है कि, सोमवार की दोपहर वह जेल के एक कोने में मोबाइल पर बात कर रहा था. मगर जब सुरक्षाकर्मियों की उस पर नजर पड़ी तो उसने मोबाइल को निगल लिया ।

जिसके बाद उस आरोपी ने पेट में दर्द होने की शिकायत की जिसके बाद उसे अस्पताल में ले जाया गया जहां पर डॉक्टर ने इसके बारे में सूचना दी ।

 


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बहुत ही मुश्किल है अपने बारे में लिखना । इसलिए ज्यादा कुछ नहीं, मैं बहुत ही सरल व्यतित्व का व्यक्ति हूं । खुशमिजाज हूं ए इसलिए चेहरे पर हमेशा खुशी रहती हैए और मुझे अकेला रहना ज्यादा पंसद है। मेरा स्वभाव है कि मेरी बजह से किसी का कोई नुकसान नहीं होना चाहिए और ना ही किसी का दिल दुखना चाहिए। चाहे वो व्यक्ति अच्छा हो या बुरा। मेरे इस स्वभाव के कारण कभी कभी मुझे खामियाजा भी भुगतान पड़ता है। मैं अक्सर उनके बारे में सोचकर भुला देता हूं क्योंकि खुश रहने का हुनर सिर्फ मेरे पास है। मेरी अपनी विचारए विचारधारा है जिसे में अभिव्यक्त करता रहता हूं । जिन लोगों के विचारों से कभी प्रभावित भी होता हूं तो उन्हें फोलो कर लेता हूं । अभी सफर की शुरुआत है मैने कंप्यूटर ऑफ माटर्स की डिग्री हासिल की है और इस मीडीया क्षेत्र में अभी नया हूं। मगर मुझे अब इस क्षेत्र में काम करना अच्छा लग रहा है। और फिर इसी में काम करने का मन बना लेना दूसरों के लिये अश्चर्य पूर्ण होगा। लेकिन इससे पहले और आज भी ब्लागर ने एक मंच दिया चिठ्ठा के रुप में, जहां बिना रोक टोक के आसानी से सबकुछ लिखा या बताया जा सका। कभी कभी मन में उठ रही बातों या भावों को शब्दों में पिरोयाए उनमें खुद की और दूसरों की कहानी कही। कभी उनके द्वारा किसी को पुकाराए तो कभी खुद ही रूठ गया। कई बार लिखने पर भी मन सतुष्ट नहीं हुआ और निरंतर कुछ नया लिखने मन बनता रहता है। अजीब सी बेचैनी जो न जाने क्या करवाएगी और कितना कुछ कर गुजर जाने की तमन्ना लिए निकले हैं इन सफरों, जहां उम्मीद और विश्वास दोनों कायम हैं जो अर्जुन के भांति लक्ष्य को भेद देंगे । मुझे अभी अपने जीवन में बहुत कुछ करना है किसी के सपनों को पूरा करना हैं । अब तो बस मेरा एक ही लक्ष्य हैं कि मैं बस उसके सपने पूरें करू।

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