प्रधानमंत्री बोले, ‘मजामा छे, सोब खूब भालो’

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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रविवार को 50 हजार अमेरिकी भारतीयों को संबोधित करते हुए ‘हाउडी मोदी’ के जवाब में कहा कि भारत में सब कुछ ठीक है। इसके साथ ही उन्होंने इस बात को कई अन्य भाषाओं में व्यक्त करने की कोशिश की। भारत में भाषाओं की विविधता पर जोर देते हुए उन्होंने कहा, “सब चंगे सी, मजामा छे, एलम सौकियाम, सब खूब भालो, सबू भाल्लाछी।”

राष्ट्रपति ट्रंप की मौजूदगी में वहां मौजूद अमेरिकी नागरिकों को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा, “मेरे अमेरिकी मित्र इससे आश्चर्यचकित हैं कि मैंने क्या कह दिया। प्रेसिडेंट ट्रंप और मेरे अमेरिकी मित्रों, मैंने भारतीय भाषाओं में केवल यह कहा कि सब कुछ ठीक है। ”

मोदी ने कहा कि भारत भिन्न भाषाओं, भिन्न संस्कृति, भिन्न खानपान के साथ विविधताओं से भरपूर है और यही इसकी अनूठी पहचान है और ताकत है।

उन्होंने कहा, “हमारा जीवंत लोकतंत्र हमारा आधार है और यही हमारी प्रेरणा है।”

न्यूज स्त्रोत आईएएनएस


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बहुत ही मुश्किल है अपने बारे में लिखना । इसलिए ज्यादा कुछ नहीं, मैं बहुत ही सरल व्यतित्व का व्यक्ति हूं । खुशमिजाज हूं ए इसलिए चेहरे पर हमेशा खुशी रहती हैए और मुझे अकेला रहना ज्यादा पंसद है। मेरा स्वभाव है कि मेरी बजह से किसी का कोई नुकसान नहीं होना चाहिए और ना ही किसी का दिल दुखना चाहिए। चाहे वो व्यक्ति अच्छा हो या बुरा। मेरे इस स्वभाव के कारण कभी कभी मुझे खामियाजा भी भुगतान पड़ता है। मैं अक्सर उनके बारे में सोचकर भुला देता हूं क्योंकि खुश रहने का हुनर सिर्फ मेरे पास है। मेरी अपनी विचारए विचारधारा है जिसे में अभिव्यक्त करता रहता हूं । जिन लोगों के विचारों से कभी प्रभावित भी होता हूं तो उन्हें फोलो कर लेता हूं । अभी सफर की शुरुआत है मैने कंप्यूटर ऑफ माटर्स की डिग्री हासिल की है और इस मीडीया क्षेत्र में अभी नया हूं। मगर मुझे अब इस क्षेत्र में काम करना अच्छा लग रहा है। और फिर इसी में काम करने का मन बना लेना दूसरों के लिये अश्चर्य पूर्ण होगा। लेकिन इससे पहले और आज भी ब्लागर ने एक मंच दिया चिठ्ठा के रुप में, जहां बिना रोक टोक के आसानी से सबकुछ लिखा या बताया जा सका। कभी कभी मन में उठ रही बातों या भावों को शब्दों में पिरोयाए उनमें खुद की और दूसरों की कहानी कही। कभी उनके द्वारा किसी को पुकाराए तो कभी खुद ही रूठ गया। कई बार लिखने पर भी मन सतुष्ट नहीं हुआ और निरंतर कुछ नया लिखने मन बनता रहता है। अजीब सी बेचैनी जो न जाने क्या करवाएगी और कितना कुछ कर गुजर जाने की तमन्ना लिए निकले हैं इन सफरों, जहां उम्मीद और विश्वास दोनों कायम हैं जो अर्जुन के भांति लक्ष्य को भेद देंगे । मुझे अभी अपने जीवन में बहुत कुछ करना है किसी के सपनों को पूरा करना हैं । अब तो बस मेरा एक ही लक्ष्य हैं कि मैं बस उसके सपने पूरें करू।

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