सास-ससुर से नहीं देखा गया विधवा बहू का दर्द, उठाया कुछ ऐसा कदम…

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दोस्तों, किसी भी महिला के वो समय सबसे बूरा होता है जब उसके पति की मौत हो जाती है और वो विधवा बन जाती हैं । कुछ ऐसा ही उत्तराखंड की रहने वाली कविता के साथ भी हुआ । मगर उसके सास ससुर से उसका ये दर्द देखा नहीं गया जिसके बाद उन्होंने उसके लिए कुछ ऐसा कदम उठाया जिसे जानकर आप भी हैरान हो जाएंगे ।

दरअसल, देहरादून के बालावाला निवासी विजय चंद के बेटे संदीप की शादी साल 2014 में कविता के साथ हुई, मगर शादी के कुछ समय बाद ही उसकी मौत हो गई । अपने पति की अचानक मौत से कविता भी पूरी तरह से टूट गई । कभी-कभी उसे लगता था कि वो सबकुछ छोड़-छाड़कर अपने मायके चली जाए, मगर उसे हमेशा अपने सास ससुर का ख्याल आता​ जिसके कारण वो अपने मायके भी नहीं जा सकती थी ।

इधर, कविता के सास-ससुर से भी अपनी बहू की ये हालत देखी नहीं जा रही थी, जिसके बाद उन्होंने उसकी दूसरी शादी कर दी । बताया जा रहा है कि कविता के सास ससुर ने उसे एक बेटी की तरह अपने घर से विदा किया ।

 


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बहुत ही मुश्किल है अपने बारे में लिखना । इसलिए ज्यादा कुछ नहीं, मैं बहुत ही सरल व्यतित्व का व्यक्ति हूं । खुशमिजाज हूं ए इसलिए चेहरे पर हमेशा खुशी रहती हैए और मुझे अकेला रहना ज्यादा पंसद है। मेरा स्वभाव है कि मेरी बजह से किसी का कोई नुकसान नहीं होना चाहिए और ना ही किसी का दिल दुखना चाहिए। चाहे वो व्यक्ति अच्छा हो या बुरा। मेरे इस स्वभाव के कारण कभी कभी मुझे खामियाजा भी भुगतान पड़ता है। मैं अक्सर उनके बारे में सोचकर भुला देता हूं क्योंकि खुश रहने का हुनर सिर्फ मेरे पास है। मेरी अपनी विचारए विचारधारा है जिसे में अभिव्यक्त करता रहता हूं । जिन लोगों के विचारों से कभी प्रभावित भी होता हूं तो उन्हें फोलो कर लेता हूं । अभी सफर की शुरुआत है मैने कंप्यूटर ऑफ माटर्स की डिग्री हासिल की है और इस मीडीया क्षेत्र में अभी नया हूं। मगर मुझे अब इस क्षेत्र में काम करना अच्छा लग रहा है। और फिर इसी में काम करने का मन बना लेना दूसरों के लिये अश्चर्य पूर्ण होगा। लेकिन इससे पहले और आज भी ब्लागर ने एक मंच दिया चिठ्ठा के रुप में, जहां बिना रोक टोक के आसानी से सबकुछ लिखा या बताया जा सका। कभी कभी मन में उठ रही बातों या भावों को शब्दों में पिरोयाए उनमें खुद की और दूसरों की कहानी कही। कभी उनके द्वारा किसी को पुकाराए तो कभी खुद ही रूठ गया। कई बार लिखने पर भी मन सतुष्ट नहीं हुआ और निरंतर कुछ नया लिखने मन बनता रहता है। अजीब सी बेचैनी जो न जाने क्या करवाएगी और कितना कुछ कर गुजर जाने की तमन्ना लिए निकले हैं इन सफरों, जहां उम्मीद और विश्वास दोनों कायम हैं जो अर्जुन के भांति लक्ष्य को भेद देंगे । मुझे अभी अपने जीवन में बहुत कुछ करना है किसी के सपनों को पूरा करना हैं । अब तो बस मेरा एक ही लक्ष्य हैं कि मैं बस उसके सपने पूरें करू।

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